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ममता की हार का राजस्थान कनेक्शन क्या है? क्यों राजेंद्र राठौड़ की हो रही चर्चा

बंगाल चुनाव में बीजेपी ने रिकॉर्ड जीत दर्ज की है. उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूच बिहार जिलों की 28 सीटों में से 27 पर बीजेपी ने विजय हासिल की. बीजेपी की जीत में राजस्थान के नेताओं की अहम भूमिका मानी जा रही है.

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ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में राजेंद्र राठौड़ और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला. (Photo: PTI)
ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में राजेंद्र राठौड़ और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला. (Photo: PTI)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की रिकॉर्ड जीत के पीछे जहां राष्ट्रीय नेतृत्व की रणनीति रही, वहीं राजस्थान के बीजेपी नेताओं की सक्रिय भागीदारी भी निर्णायक साबित हुई. पार्टी की ओर से दी गई जिम्मेदारियों को राजस्थान के नेताओं ने जमीन पर उतारते हुए कई क्षेत्रों में जीत के लिए मदद की.

केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव को चुनाव अभियान प्रभारी और बीजेपी राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. दोनों नेताओं ने पूरे चुनावी अभियान को संगठित और रणनीतिक तरीके से संचालित किया, जिसका असर नतीजों में साफ दिखाई दिया.

ममता बनर्जी के निर्वाचन क्षेत्र भवानीपुर में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और उनकी टीम ने मोर्चा संभाला. वहीं केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी ने उत्तर बंगाल में प्रभावी अभियान चलाकर भाजपा की स्थिति मजबूत की.

Photo: Instagram/@rajendra4bjp
Photo: Instagram/@rajendra4bjp

राज्य वित्त आयोग अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 21 चुनावी सभाओं और रोड शो का मैनेजमेंट संभाला, जबकि पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने इनमें से तीन सभाओं की जिम्मेदारी निभाई. जिन जिलों में प्रधानमंत्री ने सभाएं कीं, वहां करीब 75 प्रतिशत विधानसभा सीटों पर बीजेपी को जीत मिली.

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पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी और उनकी टीम, जिसमें सुनील कटारा, नीरज जैन और राकेश पाठक शामिल रहे, उन्होंने बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्रियों की सभाओं में कोऑर्डिनेशन किया, जिससे अभियान को गति मिली.

उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूच बिहार जिलों की 28 विधानसभा सीटों में से बीजेपी  ने 27 सीटों पर जीत दर्ज कर ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. इस क्षेत्र में कैलाश चौधरी ने 6  महीने तक डेरा डालकर काम किया, जबकि गजेन्द्र सिंह शेखावत ने लगातार 10  दिनों तक सभी क्षेत्रों में सभाएं कीं.

आसनसोल जिले में बीजेपी विधायक जितेन्द्र गोठवाल को चुनाव प्रभारी बनाया गया था. उनके नेतृत्व में बीजेपी ने जिले की सभी 7 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की, जबकि पिछले चुनाव में पार्टी को केवल दो सीटें मिली थीं.

राजस्थान के बीजेपी नेताओं ने निभाई अहम भूमिका

कोलकाता उत्तर और दक्षिण जैसे तृणमूल कांग्रेस के मजबूत गढ़ों में भी राजस्थान के नेताओं ने प्रभावी रणनीति अपनाई. कोलकाता उत्तर की 7 सीटों में से 4 सीटों पर बीजेपी ने पहली बार जीत दर्ज की. इस क्षेत्र में विधायक अतुल भंसाली, पूर्व विधायक शंकर सिंह राजपुरोहित और डॉ. शीला विश्नोई ने लंबे समय तक डेरा डालकर अभियान चलाया.

कोलकाता दक्षिण में बीजेपी प्रदेश के पूर्व महामंत्री मोतीलाल मीणा ने चुनाव अभियान की कमान संभाली. उनके नेतृत्व में पार्टी ने आधा दर्जन सीटों पर पहली बार जीत का खाता खोला. इसके अलावा दमदम, जादवपुर और कोलकाता के अन्य इलाकों में भी राजस्थान के कई नेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी, जहां उन्होंने चुनाव अभियान को मजबूती दी और पार्टी को नई सीटों पर जीत दिलाने में योगदान दिया.

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भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में भी भाजपा ने आक्रामक रणनीति अपनाई. यहां राजेंद्र राठौड़ के नेतृत्व में कई वार्डों में राजस्थान के नेताओं को जिम्मेदारी दी गई, जिन्होंने बीजेपी उम्मीदवार को बढ़त दिलाने में भूमिका निभाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चुनावी संयोजन में राजस्थान के बीजेपी नेताओं की सक्रियता ने पश्चिम बंगाल में पार्टी की इस करिश्माई जीत को संभव बनाने में अहम योगदान दिया.

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