आदिवासी संस्कृति को विश्व मानचित्र पर जीवंत कर देने वाले भगोरिया पर्व में लोगों का उत्साह देखते ही बनता है. मध्य प्रदेश की इस पर्व से भी पहचान है.
इस मौके पर आयोजित कार्निवल में बजने वाले संगीत किसी को भी थिरकने पर मजबूर कर सकते हैं.
इस पर्व में कई महिलाएं एक ही रंग और तरह की पोशाक में देखी जा सकती हैं.
यहां मनोरंजन के लिए कई तरह के झूले भी लगाए जाते हैं. एक बड़े मेले की तरह यहां का माहौल काफी सुखद होता है.
इस दौरान आदिवासी गीत-संगीत का भी खास महत्व होता है. इस नृत्य और संगीत को देखने-सुनने दूर दूर से लोग यहां पहुंचते हैं.
साल भर मेहनत करने के बाद भगोरिया पर्व के दौरान आदिवासी पैसा भी जमकर खर्च करते हैं.
इस पर्व पर आदिवासियों में मदिरापान का भी काफी प्रचलन है. मदिरापान के बाद आदिवासी लोग नृत्य में भाग लेते हैं.
आदिवासी संस्कृति को दुनिया से परिचित कराने का बहुत बड़ा काम इस पर्व ने किया है.
कार्निवल को विदेश से भी लोग देखने आते हैं और उनके रुकने के लिए विशेष इंतजाम रहते हैं.
इस अवसर पर आयोजित कार्निवल को अपने कैमरे में कैद करने के लिए पत्रकारों का जैसे हुजूम उमड़ पड़ता है.