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पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत के बाद बदला सड़क का नाम? मस्जिद बाड़ी रोड को लेकर बड़ा दावा

पश्चिम बंगाल के बारासात में मस्जिद बाड़ी रोड का नाम बदलकर नेताजी पल्ली रोड किए जाने का दावा किया जा रहा है. इस सिलसिले में बीजेपी नेता नितीश मंडल का बयान और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. पढ़ें पूरी कहानी.

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इस मामले को लेकर कोई अधिकारिक बयान नहीं आया (फोटो-Video Grab)
इस मामले को लेकर कोई अधिकारिक बयान नहीं आया (फोटो-Video Grab)

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की बड़ी जीत के बाद अब एक सड़क का नाम बदलने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. यह मामला उत्तर 24 परगना जिले के बारासात विधानसभा क्षेत्र के मोयना इलाके से सामने आया है. यहां कुछ स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर एक सड़क का नाम बदल दिया. बताया जा रहा है कि पहले इस सड़क का नाम मस्जिद बाड़ी रोड था, जिसे बदलकर ‘नेताजी पल्ली रोड’ कर दिया गया. इस घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज हो गई है. हालांकि प्रशासन की ओर से इस बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा मामला मोयना इलाके का है जहां स्थानीय लोगों का एक समूह सड़क के नाम को बदलता हुआ नजर आया. सड़क का पुराना नाम 'मस्जिद बाड़ी रोड' बताया जा रहा है, जो लंबे समय से प्रचलित था. लेकिन हाल ही में इसे बदलकर 'नेताजी पल्ली रोड' करने की कोशिश की गई. इस बदलाव को लेकर कुछ लोगों ने समर्थन जताया, जबकि कुछ लोगों ने इस पर सवाल भी उठाए हैं. सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है.

बीजेपी के मंडल-4 अध्यक्ष और स्थानीय निवासी नितीश मंडल ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने दावा किया कि इस सड़क का नाम बदलने की मांग पिछले 10 से 15 सालों से की जा रही थी. लेकिन प्रशासन की ओर से कभी इसकी अनुमति नहीं मिली. नितीश मंडल के मुताबिक, जब उनकी पार्टी सत्ता में आई, तब लोगों ने खुद इस पहल को अंजाम दिया. उन्होंने कहा कि यह बदलाव स्थानीय लोगों की इच्छा के अनुसार किया गया है.

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नितीश मंडल ने यह भी दावा किया कि इलाके में करीब 15 हजार लोग रहते हैं, जिनमें मुस्लिम आबादी 500 से 1000 के बीच है. उनका कहना है कि बहुसंख्यक आबादी की मांग को देखते हुए सड़क का नाम नेताजी पल्ली रोड रखा गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन पहले इस काम को करने की अनुमति नहीं दे रहा था. इसके पीछे उन्होंने पंचायत सदस्य हलीमा बीबी की मौजूदगी को एक वजह बताया.

हालांकि, इस पूरे मामले में प्रशासन की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. यह भी स्पष्ट नहीं है कि सड़क का नाम बदलने की प्रक्रिया कानूनी रूप से पूरी की गई है या नहीं. आम तौर पर किसी भी सार्वजनिक स्थान या सड़क का नाम बदलने के लिए प्रशासनिक मंजूरी जरूरी होती है. ऐसे में बिना अनुमति के किए गए इस बदलाव पर आगे विवाद बढ़ सकता है. फिलहाल, यह मामला राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है.

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