उत्तर भारत में एक बार फिर मौसम करवट लेने के लिए तैयार है. अप्रैल 2026 के पहले हफ्ते में एक मजबूत पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तर भारत के कई राज्यों पर दस्तक देने वाला है. मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के मुताबिक, 3 से 5 अप्रैल के बीच यह सिस्टम भारी बारिश, बर्फबारी, गरज-चमक के साथ ओले और तेज हवाओं का कहर बरपाएगा.
इस विक्षोभ की शुरुआत इस वीकेंड से ही दिखने लगेगी. उत्तर के मैदानी इलाकों में शनिवार-रविवार से ही बारिश और आंधी-तूफान की गतिविधियां शुरू हो सकती हैं. बता दें कि मार्च महीने में भी कई बार मौसम में ऐसे बदलाव देखे गए थे अब अप्रैल के पहले हफ्ते में भी यही स्थिति बनी रहने की संभावना है.
अप्रैल में देश का मौसम कैसा रहेगा?
मौसम विभाग के मुताबिक, 3 अप्रैल को गुजरात और पश्चिम व दक्षिण-पूर्व राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है. वहीं, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में 3 से 5 अप्रैल के बीच बारिश की तीव्रता बढ़ेगी. जबकि पश्चिमी हिमालय के ऊंचे इलाकों में हल्की से मध्यम बर्फबारी हो सकती है. वहीं, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में 3 और 4 अप्रैल को बारिश, गरज-चमक और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की भी संभावना है.
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इन राज्यों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
उत्तर और मध्य भारत की बात करें तो हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्से, हिमाचल प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश के मौसम पर वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का खास असर देखने को मिल सकता है. इन राज्यों में तेज हवाओं के साथ बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी हो सकती है. हवाओं की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है.
फसलों पर मौसम का क्या असर पड़ेगा?
मौसम में बदलाव खेतों के लिए दोहरा असर वाला साबित हो सकता है. एक तरफ बारिश से मिट्टी में नमी बढ़ेगी, जो खेती के लिए फायदेमंद है. लेकिन दूसरी तरफ, रबी फसलें (जैसे गेहूं, सरसों आदि) अब पकने के करीब हैं, भारी बारिश, ओले और तेज हवाएं इन फसलों को नुकसान पहुंचा सकती हैं.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मार्च की तरह अप्रैल के शुरुआती दिनों में भी बार-बार पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव रहेंगे. इस साल अप्रैल में भी गर्मी एवं लू से राहत मिले रहने की उम्मीद है.