उत्तरकाशी की टनल से 41 मजदूर सकुशल बाहर निकाल लिए गए हैं. इस बीच रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रहे इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष अर्नोल्ड डिस्क ने ऑस्ट्रेलियाई पीएम की बधाई पर जवाब दिया है. अर्नोल्ड डिस्क ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की बधाई पर कहा, 'धन्यवाद... प्रधानमंत्री. यह दिखाकर मुझे काफी खुशी हुई कि हम सिर्फ क्रिकेट में ही बेहतरीन नहीं है, बल्कि हम दूसरे काम भी अच्छी तरह से करते हैं. इसमें सुरंग में चलाया जा रहा रेस्क्यू ऑपरेशन भी शामिल है.'
सत्रह दिनों तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन में ऑस्ट्रेलियाई एक्सपर्ट्स अर्नोल्ड की बड़ी भूमिका है. वह भूमिगत और परिवहन बुनियादी ढांचे में एक्सपर्ट हैं. वह न सिर्फ अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन से जुड़े जोखिमों पर सलाह देते हैं, बल्कि उन्हें इसमें महारत हासिल है. अर्नोल्ड जिनेवा के इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के प्रमुख हैं. यह कंपनी अंडरग्राउंड कंस्ट्रक्शन के लिए कानूनी, पर्यावरणीय, राजनीतिक और अन्य जोखिमों को लेकर सलाह देती है.
जो वादा किया था, वो निभाया
अर्नोल्ड 20 नवंबर को इस रेस्क्यू ऑपरेशन से जुड़े थे. इसके बाद उन्होंने भारत की मदद करने को लेकर कहा था कि उन्हें अच्छा लग रहा है. डिक्स ने कहा था कि पहाड़ों ने हमें एक चीज सिखाई है कि विनम्र रहना है. अर्नोल्ड डिक्स वही शख्स हैं, जिन्होंने दावा किया था कि सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को क्रिसमस से पहले निकाल लिया जाएगा.
कौन है अर्नोल्ड डिक्स?
डिक्स इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं. लेकिन साथ ही वह इंजीनियर, वकील, जियोलॉजिस्ट भी हैं. उन्होंने मेलबर्न की मोनाश यूनिवर्सिटी से साइंस और लॉ में डिग्री ली थी.उन्होंने अपनी तीन दशकों के करियर में कई भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने 2016 से 2019 के बीच कतर रेड क्रेसेंट सोसाइटी के लिए वॉलिंटेयर के तौर पर काम किया है, जहां उन्होंने इसी तरह की अंडरग्राउंड घटनाओं पर काम किया है.
2020 में डिक्स लॉर्ड रॉबर्ट मेयर पीटीर विकरी क्यूसी कंपनी से जुड़े. वह यहां तकनीकी और रेगुलेटरी सलाह देते हैं.बता दें कि सुरंग में फंसे मंजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के इस रेस्क्यू मिशन के लिए इंटरनेशनल टनलिंग एंड अंडरग्राउंड स्पेस एसोसिएशन के अध्यक्ष अर्नोल्ड डिक्स को भी सरकार ने बुलावा भेजा था.
12 नवंबर से फंसे थे मजदूर
उत्तरकाशी का टनल हादसा दिवाली के दिन यानी 12 नवंबर को हुआ था. ये मजदूर इसी सुरंग में काम कर रहे थे. तभी सुरंग धंस गई और मजदूर 60 मीटर लंबी मलबे की दीवार के पीछे धंस गए. उसके बाद से ही इन मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए तेजी से ऑपरेशन चलाया जा रहा था.