भारत में एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ़्तारी के बाद हुई हाई-लेवल जांच में कई अहम सुराग सामने आए हैं. मैथ्यू वैनडाइक उन सात विदेशियों में शामिल थे, जिन्हें दो दिन पहले भारत के ख़िलाफ़ रची गई एक कथित साज़िश के सिलसिले में गिरफ़्तार किया गया था. एनआईए सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी ऑपरेटिव मैथ्यू वैन डाइक की आगिरफ्तारी के बाद सुरक्षा एजेंसियों को कई अहम और चौंकाने वाले सुराग हाथ लगे हैं.
मुख्य मास्टरमाइंड माना जाने वाला वैन डाइक सोशल मीडिया पर 'हिट-मैन' के नाम से एक्टिव था. जांच एजेंसियां अब उसके मोबाइल और अकाउंट्स के जरिए यह पता लगा रही हैं कि वह भारत के पूर्वोत्तर इलाके तक कैसे पहुंचा.
मैथ्यू वैन डाइक एक भाड़े का मिलिट्री ट्रेनर है, जो गुरिल्ला युद्ध, सामरिक ऑपरेशन और ड्रोन तकनीक की स्पेशल फोर्सेज स्टाइल ट्रेनिंग देने के लिए जाना जाता है. उसका नाम पहले लीबियाई सिविल वॉर से भी जुड़ चुका है. वह स्थानीय लोगों को खुद लड़ने के लिए ट्रेन्ड करने और वेनेजुएला, म्यांमार व ईरान जैसे देशों में विद्रोही समूहों से जुड़ने की अपील कर रहा था. भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उसके भारत विरोधी या प्रतिबंधित संगठनों से संपर्कों और जासूसी से जुड़ी जांच कर रही हैं.
सोशल मीडिया और मोबाइल से खुले राज
मैथ्यू वैन डाइक की गिरफ्तारी के बाद उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स की जांच में कई फैक्ट सामने आए हैं. सुरक्षा एजेंसियों के हाथ कुछ ऐसी रिकॉर्डिंग और नोट्स लगे हैं, जिनमें उसने 'इतिहास की दिशा बदलने' और 'आजादी को हर इंसान का अधिकार' बताया है. वैन डाइक का मकसद विदेशी लड़ाकों को भेजने के बजाय स्थानीय लोगों को जंग के लिए तैयार करना था.
पूर्वोत्तर भारत और ट्रांजिट कॉरिडोर का खतरा
खुफिया सूत्रों के मुताबिक, वैन डाइक की गिरफ्तारी इसलिए अहम है क्योंकि वह पूर्वोत्तर भारत के आस-पास एक्टिव नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है. आशंका जताई गई है कि वह ड्रोन और आधुनिक युद्ध तकनीक की ट्रेनिंग दे रहा था और भारतीय क्षेत्र का इस्तेमाल ट्रांजिट कॉरिडोर के रूप में किया जा रहा था. उसके संपर्कों की जांच प्रतिबंधित संगठनों के साथ उसके जुड़ाव को लेकर की जा रही है.
लीबिया से म्यांमार तक फैला नेटवर्क
वैन डाइक पहली बार लीबियाई सिविल वॉर के दौरान चर्चा में आया था. उसने दुनिया भर के भाड़े के लड़ाकों से वेनेजुएला और म्यांमार जैसे देशों में विद्रोहियों का साथ देने की अपील की थी. भारत में उसकी मौजूदगी और जासूसी की आशंकाओं ने सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया है, क्योंकि उसका असली मिशन बेहद संवेदनशील और सामरिक ऑपरेशनों से जुड़ा नजर आता है.