जम्मू कश्मीर में आतंकी घुसपैठ को लेकर सुरक्षाबल अलर्ट हैं. सुरक्षाबलों ने सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है जिसके बाद घुसपैठ की कोशिश में जुटे आतंकियों, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई ने रणनीति बदल ली है. खुफिया सूत्रों के मुताबिक आईएसआई और आतंकियों ने घुसपैठ के लिए अब राजौरी और पुंछ के इलाके को चिह्नित किया है.
खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक इस इलाके में घने जंगल हैं जहां से घुसपैठ कराने में अन्य इलाकों की तुलना में आसान हो सकता है. राजौरी और पुंछ का केसरी हिल का इलाका जहां पर प्राकृतिक गुफाएं हैं, आतंकी घुसपैठ कर यहां पर छिप जाते हैं. इसके चलते उनको ढूंढना काफी सुरक्षाबलों के लिए कठिन रहता है.
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की योजना अब आतंकियों की इसी इलाके से घुसपैठ कराने की है. इसी को देखते हुए अब इस इलाके के सामने पाकिस्तान में हाई-फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं. राजौरी और पुंछ जिले में आतंकी गतिविधियां बढ़ाने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ने ये नई साजिश रची है.
सूत्र बताते हैं कि राजौरी और पुंछ जिले में घुसपैठ के बाद आतंकी जंगलों में छिप जाते हैं. इन आतंकियों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स के बीच अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में करीब 20 से 30 जगह ऐसे हाई-फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर लगा रहा है जिसकी कनेक्टिविटी अधिक हो और आतंकियों तक मैसेज पहुंचाया जा सके.
टावर लगाने के पीछे क्या है ISI का प्लान
सूत्रों के मुताबिक हाई फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर लगाने के पीछे आईएसआई का मकसद ये है कि घुसपैठ के समय आतंकी बेहतर तरीके से संवाद कर सकें. खुफिया सूत्रों के मुताबिक 20-30 से ज्यादा जगह पाकिस्तान हाई फ्रीक्वेंसी टावर लगा चुका है जिनमें बोकरा गली, चकियास, चिरीकोट, काहूता, चप्परकड़ा, कालामुला, मंदार, बल्लनवाली, धोक, काचारबन, सनई रावलकोट शामिल हैं.
खुफिया सूत्रों के मुताबिक बिम्बर गली के सामने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के पंजन, मैट्रीयन, गोरागुजरान, लनजोट, दांतोंटे, ताराकुंडी, जांद्रोट में हाई फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर लगाए जाने हैं. इनकी रेंज भारतीय सीमा के भीतर तक रहेगी. इसका फायदा आतंकी उठाएंगे. खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तानी सेना और आईएसआई की हाई फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर लगाने की सोच के पीछे का मकसद भी बताया है.
खुफिया एजेंसियों के मुताबिक हाई फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर लगाने की सोच के पीछे आईएसआई का मकसद ये है कि आतंकियों के साथ-साथ ओवरग्राउंड वर्कर्स भी इसी मोबाइल टावर के सिग्नल से आपस में बात करें. इससे फोन कॉल इंटरसेप्ट किए जाने का खतरा काफी कम हो जाएगा. ये हाई फ्रीक्वेंसी टावर चीनी तकनीक पर आधारित हैं. इतने बड़े पैमाने पर हाई फ्रीक्वेंसी मोबाइल टावर स्थापित करने का प्लान पाकिस्तान ने पिछले एक महीने में शुरू किया है.
आतंकियों ने तैयार किया डिजिटल टेरर प्लान
पाकिस्तान पोषित आतंकी जम्मू कश्मीर में भारतीय फौज से मुकाबला करने में फेल हो रहे हैं तो अब अलग-अलग हथकंडे अपनाने लगे हैं. आतंकियों ने अब डिजिटल टेरर प्लान तैयार किया है. खुफिया एजेंसियों के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI डिजिटल डिवाइस ट्रेंड आतंकियों की घुसपैठ करा रही है. इन आतंकियों को एनक्रिप्टेड मैप उपलब्ध कराए जा रहे हैं.
डिजिटल मैप में घुसपैठ के रास्ते पहले से फीड होते हैं जिनका इस्तेमाल आतंकी करते हैं. यही नहीं, सीमा पार से मिल रहे निर्देश पास करने के लिए भी हाइली एनक्रिप्टेड ऐप का इस्तेमाल आतंकी कर रहे हैं जिससे इन्हें भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इंटरसेप्ट ना कर पाएं. सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे अब तक 12 से ज्यादा वेब बेस्ड हाइली एनक्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप की जानकारी भी मिली है जिनका इस्तेमाल सीमा पार बैठे आतंकियों के कमांडर्स कश्मीर में मौजूद आतंकियों को संदेश भेजने के लिए कर रहे हैं.