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घर से भागे 13 साल की बहन और 9 साल की भाई, स्कूल न जाने पर मां बाप से पड़ी थी डांट

बेंगलुरु से लापता 13 वर्षीय किशोरी और उसका नौ वर्षीय भाई करीब 300 किलोमीटर दूर शिवमोग्गा जिले से सुरक्षित बरामद किए गए. स्कूल न जाने पर माता-पिता की डांट से नाराज होकर दोनों घर से निकल गए थे. पुलिस ने सीसीटीवी और सोशल मीडिया की मदद से बच्चों को खोजकर परिजनों से मिलाया.

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घर से भागे नाबालिग भाई- बहन (Photo: Representational image )
घर से भागे नाबालिग भाई- बहन (Photo: Representational image )

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से लापता हुए दो नाबालिग भाई-बहनों को पुलिस ने सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों से मिला दिया है. यह मामला बेंगलुरु के एचएएल थाना क्षेत्र अंतर्गत अश्वथनगर का है, जहां 13 साल की लड़की और उसका 9 वर्षीय भाई माता-पिता की डांट से नाराज होकर घर छोड़कर चले गए थे. दोनों करीब 300 किलोमीटर दूर शिवमोग्गा जिले के भद्रावती तक पहुंच गए थे.

पुलिस के अनुसार, दोनों बच्चों को स्कूल नहीं जाने को लेकर माता-पिता ने डांटा था. इससे आहत होकर किशोरी अपने छोटे भाई को साथ लेकर घर से निकल गई. बताया जा रहा है कि किशोरी ने राज्य सरकार की ‘शक्ति’ मुफ्त बस यात्रा योजना का लाभ उठाते हुए अपने आधार कार्ड के जरिए बस में सफर किया, जबकि उसने अपने भाई को बिना टिकट साथ ले लिया.

घर से निकलने के बाद दोनों बच्चे सीधे बेंगलुरु के माजेस्टिक बस स्टैंड पहुंचे, जहां से उन्होंने शिवमोग्गा जाने वाली बस पकड़ी. जब देर शाम तक बच्चे घर नहीं लौटे तो परिजनों ने पहले अपने स्तर पर तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. इसके बाद एचएएल थाने में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई.

शिकायत मिलते ही पुलिस हरकत में आई. बच्चों की तलाश के लिए राज्य भर के पुलिस थानों को अलर्ट जारी किया गया और बच्चों की जानकारी सोशल मीडिया के जरिए भी साझा की गई. पुलिस ने आसपास के सीसीटीवी फुटेज की जांच की, जिसमें दोनों बच्चे एक बैग के साथ घर से निकलते और माजेस्टिक बस स्टैंड की ओर जाते दिखाई दिए.

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सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के आधार पर भद्रावती के कुछ स्थानीय लोगों ने बच्चों को पहचान लिया और इसकी सूचना पुलिस को दी. इसके बाद एचएएल पुलिस ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से दोनों बच्चों को सुरक्षित ट्रेस कर लिया.

पुलिस ने दोनों बच्चों को बेंगलुरु लाकर काउंसलिंग कराई. अधिकारियों के अनुसार, बच्चों ने भावनात्मक स्थिति में घर छोड़ने की बात स्वीकार की. समझाइश और काउंसलिंग के बाद दोनों को सुरक्षित रूप से उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया.
 

 

 

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