केंद्रीय कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. शीर्ष अदालत में जजों की संख्या में 4 पदों की बढ़ोतरी की जाएगी. फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित कुल 34 जजों के पद स्वीकृत हैं. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सहित जजों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी.
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार संसद के अगले सत्र में एक नया विधेयक लाएगी. इस विधेयक के जरिए शीर्ष अदालत में जजों की संख्या में 4 पदों की बढ़ोतरी की जाएगी.
अभी अदालत में दो पद खाली भी चल रहे हैं. संसद में इस बिल के पास होने और कानून बन जाने के बाद जजों की कुल संख्या 38 हो जाएगी. सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या में आखिरी बार बदलाव साल 2019 में किया गया था.
कब-कब बढ़ाए गए जज?
2019 में जजों की संख्या (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) 30 से बढ़ाकर 33 की गई थी. सुप्रीम कोर्ट अधिनियम 1956 के मुताबिक, मुख्य न्यायाधीश के अलावा सिर्फ 10 जजों का प्रावधान था. समय के साथ इसे संशोधनों के जरिए बढ़ाया गया. 1960 में जजों की संख्या बढ़ाकर 13 की गई. संशोधन के बाद इस संख्या को 17 तक पहुंचाया गया.
1986 में जजों की संख्या 17 से बढ़ाकर 25 (मुख्य न्यायाधीश को छोड़कर) की गई. फिर 2009 में जजों की संख्या 25 से बढ़ाकर 30 कर दी गई. वहीं, 2019 में मुख्य कानून में संशोधन कर संख्या 33 (CJI को छोड़कर) की गई.
कैसे होती है नियुक्ति और पद की बढ़ोतरी?
सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए संविधान के आर्टिकल 124(3) में योग्यताएं बताई गई हैं. कोई भी भारतीय नागरिक, जिसने कम से कम पांच साल तक हाईकोर्ट में जज के तौर पर काम किया हो या 10 साल तक वकील रहा हो, जज बन सकता है. इसके अलावा किसी प्रतिष्ठित कानूनविद् को भी इस पद पर नियुक्त किया जा सकता है.
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कैसे बढ़ती है जजों की संख्या?
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया मुख्य न्यायाधीश की सिफारिश से शुरू होती है. मुख्य न्यायाधीश इसे लेकर केंद्रीय कानून मंत्री को पत्र लिखते हैं. इसके बाद वित्त मंत्रालय से सलाह ली जाती है. फिर कानून मंत्रालय का न्याय विभाग एक ड्राफ्ट बिल तैयार कर कैबिनेट के पास भेजता है, जिसे अब मंजूरी मिल गई है.