भारत के न्यायिक इतिहास के एक बहुत बड़े पन्ने को आज सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया है. पर्यावरण कानून से जुड़े सबसे चर्चित और ऐतिहासिक मामले 'एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ' को कोर्ट ने औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया है. यह कानूनी जंग करीब 40 साल पहले 1985 में शुरू हुई थी और दशकों तक पर्यावरण से जुड़े कई बड़े फैसलों का आधार बनी. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने आदेश देते हुए साफ कर दिया कि अब इस पुराने मामले में कोई भी नई अर्जी स्वीकार नहीं की जाएगी.
अदालत ने भले ही पुराने केस को बंद कर दिया हो, लेकिन दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की समस्या को देखते हुए सुनवाई जारी रखने का फैसला किया है. कोर्ट ने निर्देश दिया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के मुद्दे पर अब एक नया स्वतः संज्ञान मामला दर्ज किया जाए. सुप्रीम कोर्ट में अब इस केस का नया टाइटल 'In Re: Issues of Air Pollution in the National Capital Region (NCR)' होगा. आसान शब्दों में कहें तो, अब दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर अदालत खुद संज्ञान लेकर सुनवाई करेगी.
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पुरानी अर्जियों पर अब नए सिरे से एक्शन
अदालत ने साफ किया है कि पुराने मामले के बंद होने से काम नहीं रुकेगा. सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि पुराने केस में जितनी भी अंतरिम अर्जियां अभी लंबित हैं, उन्हें अब इस नए स्वतः संज्ञान वाले मामले में अलग-अलग रिट याचिकाओं के रूप में दर्ज किया जाए. इसका मकसद यह है कि हर मुद्दे पर साफ और व्यवस्थित तरीके से सुनवाई हो सके.
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NCR के प्रदूषण पर अब सीधा फोकस
इस बदलाव के बाद अब प्रदूषण से जुड़ी कानूनी लड़ाई का स्वरूप बदल जाएगा. पुराना मामला दशकों से चला आ रहा था, लेकिन अब नए टाइटल के साथ कोर्ट का पूरा फोकस दिल्ली-NCR की जहरीली हवा और उससे जुड़े ताजा मुद्दों पर होगा. कोर्ट के इस कदम से उम्मीद जगी है कि अब प्रदूषण नियंत्रण को लेकर चल रही कानूनी कार्यवाही में और भी तेजी आएगी.