देश की राजधानी दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट चल रहा है. इस आयोजन में दुनियाभर के टेक दिग्गजों के साथ ही फ्रांस के रा्ष्टपति इमैनुएल मैक्रो और कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष भी शामिल होने भारत आए. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस आयोजन को अव्यवस्थित पीआर कहते हुए सरकार को घेरा था. वहीं, उन्हीं की पार्टी के सांसद शशि थरूर ने इस समिट की खुलकर तारीफ की है.
केरल के तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस के सांसद शशि थरूर ने कहा है कि शुरुआती दो दिन बेहद अच्छे रहे हैं. कुछ गड़बड़ियां हुईं, लेकिन इतने बड़े कार्यक्रम में ऐसा हो जाता है. उन्होंने कहा कि कई राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और नेता इसमें शामिल हुए हैं. थरूर ने कहा कि सभी ने एआई के विकास में एक नए एकीकृत विश्व की जरूरत पर जोर दिया है, जहां समाज पर प्रभाव मुख्य सिद्धांत हो.
उन्होंने कहा कि अभी समिट में नहीं गया हूं, लेकिन मेरी जानकारी के अनुसार कार्यक्रम अच्छा रहा है. शशि थरूर ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की राफेल खरीद पर टिप्पणी को लेकर सवाल पर कहा कि राफेल के कुछ हिस्से भारत में बन रहे हैं. इससे रक्षा मजबूत होगी और आत्मनिर्भरता बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि भारत डिफेंस इसलिए मजबूत करता है, क्योंकि हम युद्ध नहीं चाहते. कोई हमें कमजोर समझकर युद्ध का जोखिम ना ले. यह पूरी तरह रक्षात्मक है और वह इस पर सरकार का समर्थन करते हैं.
शशि थरूर ने फिल्म केरल स्टोरी 2 पर कहा कि पहली फिल्म नफरत फैलाने वाली थी. उन्होंने कहा कि हजारों लोगों के धर्मांतरण का दावा सही नहीं था और ऐसे कुछ मामले कई साल में करीब 30 थे. उन्होंने कहा कि छिटपुट मामलों को प्रचार का जरिया नहीं बनाना चाहिए. शशि थरूर ने याद दिलाया कि बचपन में अमर अकबर एंथनी जैसी फिल्मों को एंटरटेनमेंट टैक्स में छूट मिल जाया करती थी.
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उन्होंने कहा कि एआई सेक्टर में भारत की सक्रियता ने इस दिशा में नेतृत्व किया है. शशि थरूर ने यह बातें अपनी नई किताब ‘द सेज हू रीइमैजिन्ड हिंदुइज्म: द लाइफ, लेसन्स एंड लेगेसी ऑफ श्री नारायण गुरु’ के विमोचन के बाद कहीं. शशि थरूर की इस किताब का विमोचन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में किया.
उपराष्ट्रपति ने थरूर की किताब का किया विमोचन
उपराष्ट्रपति ने इस पुस्तक को नारायण गुरु की आध्यात्मिक और सामाजिक विरासत को सहेजने वाला महत्वपूर्ण कार्य बताया. शशि थरूर की यह किताब केरल में जन्में समाज सुधारक और आध्यात्मक नेता नारायण गुरु के जीवन पर आधारित है. नारायण गुरु ने जातीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया था.
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उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनका संदेश ‘एक जाति, एक धर्म, एक ईश्वर’ आज भी समानता और भाईचारे का क्रांतिकारी आह्वान है.उन्होंने कहा कि सभी के लिए खुले मंदिरों की स्थापना और शिक्षा को बढ़ावा देने जैसे उनके कदमों ने समाज में बदलाव लाया. उपराष्ट्रपति ने कहा कि किताबें सच को सहेजती हैं और विरासत को विकृत होने से बचाती हैं. थरूर की यह किताब पीढ़ियों के बीच सेतु की तरह है.