मशहूर कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में शनिवार को उनसे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लंबी बहस के बाद सुनवाई पूरी हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED), हरियाणा सरकार और वाड्रा के वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें अदालत के सामने रख दी हैं. अब सभी की निगाहें 15 अप्रैल पर टिकी हैं, क्योंकि कोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है और उसी दिन सुनाएगा कि आगे क्या होगा.
यह पूरा मामला गुरुग्राम के शिकोहपुर लैंड डील से जुड़ा है. ईडी ने इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की है, उस पर संज्ञान लेने के मुद्दे पर ही कोर्ट में यह सुनवाई चल रही थी. दरअसल, जांच एजेंसी का आरोप है कि साल 2008 में करीब 3.5 एकड़ जमीन के सौदे में भारी हेरफेर की गई थी. अब कोर्ट को यह तय करना है कि ईडी द्वारा पेश किए गए सबूतों और चार्जशीट के आधार पर मामले को आगे बढ़ाया जाए या नहीं.
58 करोड़ का लेनदेन और 43 संपत्तियों का कनेक्शन
जांच एजेंसी ईडी का दावा है कि इस पूरी लैंड डील में 58 करोड़ रुपये से ज्यादा का अवैध लेनदेन हुआ था. आरोप है कि रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी' के जरिए जमीन के कई ऐसे सौदे किए गए जो नियमों के खिलाफ थे. ईडी ने इस मामले में अब तक 43 संपत्तियों को कुर्क भी किया है. एजेंसी का सीधा आरोप है कि अपराध की कमाई को वाड्रा के नियंत्रण वाली अलग-अलग कंपनियों के जरिए घुमाया गया ताकि उसे जायज दिखाया जा सके.
आपको बता दें कि यह जांच इस बात को लेकर हो रही है कि क्या इन जमीनी सौदों से गलत तरीके से मुनाफा कमाया गया था. रॉबर्ट वाड्रा शुरू से ही इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते रहे हैं. हालांकि, उन्हें साल 2019 में इस मामले में अग्रिम जमानत मिल गई थी, लेकिन अब चार्जशीट पर कोर्ट का जो भी फैसला आएगा, वह वाड्रा की कानूनी लड़ाई के लिए बहुत अहम साबित होने वाला है.