राम सेतु भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत एक संरक्षित स्मारक नहीं है, और इसे ऐसा दर्जा देने का कोई प्रस्ताव भी फिलहाल लंबित भी नहीं है. जबकि सालों से राजनीतिक घोषणापत्रों में इसे 'राष्ट्रीय विरासत' के तौर पर घोषित किया जाता रहा है.
इंडिया टुडे की तरफ से एक्सेस किए गए एक विशेष सूचना के अधिकार (RTI) जवाब से इस बात का खुलासा हुआ है. RTI में पूछा गया था कि राम सेतु को 'प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल और अवशेष अधिनियम' के तहत 'केंद्रीय संरक्षित स्मारक' के तौर पर अधिसूचित किया गया है या नहीं.
RTI में राम सेतु को लेकर कोई गजट अधिसूचना मौजूद है या नहीं, इसके लिए कोई प्रस्ताव, सर्वेक्षण, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश, या पुरातात्विक और वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है या नहीं, जैसे सवाल भी किए थे.
इन सभी सवालों के जवाब में, ASI ने कहा कि राम सेतु न तो उसके अधिकार क्षेत्र में संरक्षित है और न ही इस दर्जे के लिए ASI के विचाराधीन है. ASI के स्मारक अनुभाग ने कहा, 'राम सेतु एएसआई के तहत राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित नहीं है और एएसआई मुख्यालय, नई दिल्ली के स्मारक अनुभाग में ऐसा कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है. इसलिए, जानकारी को 'शून्य' माना जाए.
बीजेपी ने अपने 2009 के लोकसभा घोषणापत्र में राम सेतु को 'हमारी राष्ट्रीय विरासत' बताया था. इसमें इसके धार्मिक महत्व पर जोर दिया गया और इसके संरक्षण को सामरिक चिंताओं (जैसे थोरियम भंडार और ऊर्जा सुरक्षा) से जोड़ा गया था. पार्टी ने इस संरचना को सुरक्षित रखने के लिए 'सेतुसमुद्रम शिप चैनल प्रोजेक्ट' के लिए वैकल्पिक अलाइनमेंट तलाशने का प्रस्ताव भी रखा था.
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बीजेपी ने अपने 2014 के घोषणापत्र में भी दोहराया कि राम सेतु भारत की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है. हालांकि, ASI का आरटीआई जवाब पुष्टि करता है कि राम सेतु को मौजूदा कानून के तहत संरक्षित दर्जा नहीं दिया गया है.
ये मुद्दा संसद में भी उठाया जा चुका है. 23 दिसंबर, 2022 को निर्दलीय राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने राम सेतु पर वैज्ञानिक अनुसंधान की डिटेल्स मांगी थीं और पूछा था कि क्या इसकी स्टडी की जा रही है. इस पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा था, 'अगर आसान भाषा में कहा जाए, तो ये कहना मुश्किल है कि राम सेतु का असल रूप वहां मौजूद है. हालांकि, कुछ संकेत हैं जो बताते हैं कि संरचना वहां मौजूद हो सकती है.'
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला लंबित
सु्प्रीम कोर्ट ने भी 29 अगस्त 2025 को सुब्रमण्यम स्वामी की एक याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. इसमें राम सेतु को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने को लेकर तुरंत फैसला लेने के निर्देश मांगे गए हैं. स्वामी ने पहले यूपीए सरकार के दौरान शुरू की गई 'सेतुसमुद्रम शिप चैनल परियोजना' को चुनौती देते हुए ये मुद्दा उठाया था. 2007 में, सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु क्षेत्र में काम पर अंतरिम रोक लगा दी थी. ये मामला अभी भी लंबित है.
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राम सेतु क्या है?
राम सेतु को 'एडम्स ब्रिज' या 'नल सेतु' भी कहा जाता है. ये भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर रामेश्वरम और श्रीलंका के उत्तर-पश्चिमी तट पर मन्नार द्वीप के बीच 48 किलोमीटर लंबी चूना पत्थर की एक चेन है. ये एक रैखिक कोरल रिज है जो साउथ में मन्नार की खाड़ी के उथले पानी को नॉर्थ में पाक बे से अलग करता है.