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'करेंगे देशव्यापी आंदोलन', US डील और बीज विधेयक को लेकर राकेश टिकैत की चेतावनी

किसान नेता राकेश टिकैत ने सीड्स बिल और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील का विरोध करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है. टिकैत ने कहा है कि हम सरकार से बातचीत करना चाहते हैं.

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किसान नेता राकेश टिकैत (File Photo: ITG)
किसान नेता राकेश टिकैत (File Photo: ITG)

भारत और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड डील के विरोध में अब किसान संगठन भी उतर आए हैं. भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) ने इस डील के विरोध का ऐलान किया और चेतावनी दी, कि सरकार ने अगर उनकी बात नहीं सुनी तो वे देशव्यापी आंदोलन के लिए तैयार हैं. बीकेयू ने इसे लेकर मंगलवार को दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में किसान संवाद कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें राकेश टिकैत के साथ ही विपक्षी दलों के सांसद भी मौजूद रहे.

किसान संवाद के बाद पत्रकारों से बात करते हुए बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा कि बीज विधेयक दशकों बाद एक बार फिर संसद में लाया गया है. 1992 में जो शुरू हुआ था, वह फिर लौट आया है. बीज विधेयक वापस आ गया है. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ समझौता किसानों को बर्बाद कर देगा. राकेश टिकैत ने कहा कि जब हम गांवों में जाते हैं, तो लोग हमसे पूछते हैं कि यह समझौता क्या है. यह एक ‘खामोश समझौता’ है.

उन्होंने चेतावनी दी कि सरकारी बयानों में अन्य फसलें जैसे अस्पष्ट शब्दों का इस्तेमाल किया गया है. यह असीमित आयात का रास्ता खोल सकता है. टिकैत ने कहा कि इससे किसान और आदिवासी समुदाय तबाह हो जाएंगे. बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक किसानों से बिना सलाह-मशविरे के लाए गए हैं.  उन्होंने सरकार को चेतावनी दी कि किसान आंदोलन तेज करने के लिए तैयार हैं. हम सरकार से बात करना चाहते हैं, लेकिन वह सुन नहीं रही है. राकेश टिकैत ने सांसदों से संसद में इन विधेयकों के खिलाफ लड़ाई लड़ने का आह्वान भी किया.

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विपक्षी सांसदों ने जताई चिंता

विपक्षी सांसदों ने भी इस पर चिंता जताई. आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने कहा कि बीज, कीटनाशक और बिजली से जुड़े ये विधेयक किसानों के हितों के खिलाफ हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ हुई डील से उन उत्पादों के लिए रास्ता खुल जाएगा, जो वहां प्रतिबंधित हैं. सरकार ने स्थायी समितियों की सिफारिशों को नहीं माना. सुधाकर सिंह ने कहा कि यूरोपीय संघ और अमेरिका, दोनों के साथ समझौते भारत के व्यापार सरप्लस को प्रभावित करेंगे. यह एक असमान समझौता है.

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वहीं, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सरकार की व्यापार और शुल्क नीतियों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि पहले अमेरिका ने 2.9 प्रतिशत शुल्क लगाया, फिर उसे बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया और अब 18 प्रतिशत कर दिया है. वहीं, भारत ने अमेरिकी उत्पादों के लिए अपना बाजार शून्य प्रतिशत शुल्क पर खोल दिया है. संजय सिंह ने कहा कि सरकारी बयानों में अन्य फसलें शब्द का मतलब असीमित आयात से है. जब वे अन्य फसलें कहते हैं, तो इसका मतलब होता है कि सब कुछ आएगा.

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उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत पर रूस से तेल नहीं खरीदने का दबाव भी बना रहा है. मंत्री एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं. संजय सिंह ने बीज कानूनों में बदलाव के प्रभाव को लेकर भी चेतावनी दी और कहा कि इससे देश का पैसा विदेशी कंपनियों के पास जाएगा. अनुवांशिक रूप से संशोधित बीज पहले ही उत्तर और दक्षिण भारत के कई इलाकों में कपास की फसल को नुकसान पहुंचा चुके हैं. यह भारतीय बीज बाजार के लिए आपदा साबित होगा. 
 

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