रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने देश में एक नए और खतरनाक चलन ‘व्हाइट कॉलर टेररिज़्म’ पर गंभीर चिंता व्यक्त की है. राजस्थान में भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी के 104वें स्थापना दिवस समारोह के दौरान अपने संबोधन में उन्होंने बताया कि अब उच्च शिक्षित और पेशेवर लोग भी आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं, जो शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों के लिए एक गंभीर चुनौती है.
उन्होंने दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके का उदाहरण देते हुए कहा कि इस मामले में शामिल आरोपी डॉक्टर थे.
राजनाथ सिंह ने कहा, “वे लोग जो मरीजों के लिए ‘Rx’ पर्ची लिखते हैं, उनके हाथों में RDX पाया गया.” यह स्थित समाज और शिक्षा व्यवस्था के लिए एक चेतावनी है कि शिक्षा केवल पेशेवर सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि नैतिकता, चरित्र और मानवता का विकास भी होनी चाहिए.
रक्षामंत्री ने कहा कि ज्ञान से क्षमता आती है, क्षमता से समृद्धि, और समृद्धि से धर्म तथा नैतिकता का उदय होता है. सच्चा सुख केवल धर्म और नैतिक जीवन से ही मिलता है.
उन्होंने साफ किया कि धर्म केवल मंदिर या मस्जिद जाना नहीं, बल्कि कर्तव्य और जिम्मेदारी का पालन करना है. शिक्षा यदि नैतिकता से खाली है, तो वह समाज के लिए उपयोगी नहीं रह जाती और कभी-कभी खतरनाक भी हो सकती है.
यह भी पढ़ें: ‘सुदर्शन चक्र जल्द बनेगा हकीकत', राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर में स्वदेशी हथियारों के पराक्रम को सराहा
उन्होंने यह भी कहा कि आतंकी अनपढ़ होना जरूरी नहीं है, कई आतंकी उच्च शिक्षित होते हैं लेकिन उनमें विवेक और बुद्धि का अभाव होता है. इसलिए केवल ज्ञान नहीं, बल्कि विवेक भी आवश्यक है.
आख़िर में रक्षामंत्री ने देश में रक्षा क्षेत्र के स्टार्टअप्स की प्रशंसा की और विश्वास जताया कि आने वाले 15-20 सालों में भारत हथियार निर्माताओं में आत्मनिर्भर बन जाएगा. उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी उन्नत तकनीकों के सकारात्मक उपयोग पर भी जोर दिया.
इनपुट: पीटीआई