BJP ने राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर तीखा हमला करते हुए उनकी विदेश यात्राओं का रिकॉर्ड जनता से सामने रखा है. बीजेपी नेता संबित पात्रा ने बताया कि राहुल गांधी 22 साल में 54 बार विदेश यात्रा पर गए हैं, जिन पर 60 करोड़ से ज्यादा रुपये खर्च किए गए हैं. उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि राहुल की इन यात्राओं की फंडिंग किसने की.
BJP नेता संबित पात्रा ने गुरुवार को राहुल गांधी की विदेश यात्रा का कच्चा चिट्ठा जनता के सामने रखते हुए विस्तृत जानकारी दी. पात्रा के अनुसार, राहुल गांधी ने साल 2004 से 2026 तक कुल 54 व्यक्तिगत विदेश यात्राएं की हैं, जिसमें अमेरिका, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, वियतनाम, कम्बोडिया, सिंगापुर, बहरीन, मालदीव, कतर, यूएई शामिल है. इसके अलावा वो 3 मई को बिना जानकारी के मस्कट ओमान भी गए, जिसकी फुटेज सोशल मीडिया पर मौजूद है.
उन्होंने दावा किया कि राहुल की इन यात्राओं पर करीब 60 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. इन यात्राओं में सरकारी या संसदीय समितियों के दौरों को शामिल नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि राहुल की अधिकांश यात्राएं ऑन रिकॉर्ड हैं, जिनके पास पब्लिक डेट, होस्ट डिटेल्स, प्रेस इटिनरी, संसदीय रिकॉर्ड और मीडिया रिपोर्ट्स मौजूद हैं. फिर भी इन यात्राओं की फंडिंग पूरी तरह से सीक्रेट है.
'कमाई से ज्यादा विदेश यात्रा पर खर्च'
संबित पात्रा ने राहुल गांधी के चुनावी हलफनामे (फॉर्म 26) का हवाला देते हुए बताया कि विगत दस असेसमेंट ईयर में उनकी कुल घोषित आय 11 करोड़ रुपये रही है. इसके विपरीत उनके विदेश दौरों का खर्च 60 करोड़ रुपये बैठता है. बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपनी कमाई से कई गुना अधिक पैसा विदेश यात्राओं पर खर्च कर रहे हैं. पात्रा ने पूछा कि यदि आय सीमित है तो इस भारी-भरकम खर्च की फंडिंग कौन कर रहा है और क्या इसमें किसी विदेशी स्रोत का हाथ है.
बीजेपी ने साल 2015 की एक विशिष्ट यात्रा का उदाहरण देते हुए राहुल गांधी को घेरा. पात्रा के मुताबिक 2015 में राहुल गांधी साउथ ईस्ट एशिया गए थे, जहां एक ही ट्रिप पर 4.5 करोड़ रुपये खर्च हुए. दिलचस्प बात ये है कि उस वर्ष राहुल गांधी की वार्षिक घोषित आय मात्र 86.55 लाख रुपये थी. यानी उन्होंने अपनी पूरी साल की कमाई से 5.2 गुना ज्यादा पैसा महज एक विदेश यात्रा पर लुटा दिया. बीजेपी ने इसे 'गैप बिटवीन डिक्लेयर्ड इनकम एंड ट्रैवल स्पेंड' करार दिया है.
पात्रा ने यात्रा के खर्चों का विवरण देते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी यात्राओं के दौरान किसी साधारण मोटेल में नहीं बल्कि फाइव स्टार होटलों में रुकते हैं. उनके साथ अमूमन तीन से चार लोग होते हैं और पूरा समूह बिजनेस क्लास में सफर करता है. वहां चलने के लिए सामान्य टैक्सी के बजाय 'शॉफर ड्रिवन' (ड्राइवर वाली) कारों का इस्तेमाल किया जाता है. बीजेपी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह गणना 'मिड ग्रेड सेक्शन' यानी मध्यम स्तर के खर्चों को आधार मानकर की है ताकि आंकड़े यथार्थवादी रहें.
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी ने इन यात्राओं की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए. संबित पात्रा ने पूछा कि एक सांसद के तौर पर क्या राहुल गांधी ने इन विदेशी दौरों के लिए आवश्यक अनुमतियां ली थीं. सबसे बड़ा सवाल 'फॉरेन सोर्स' यानी विदेशी फंडिंग को लेकर उठाया गया. बीजेपी ने पूछा कि यदि राहुल गांधी खुद इतना पैसा नहीं कमा रहे हैं तो उनके बिलों का भुगतान कौन कर रहा है. पात्रा ने इसे देश की सुरक्षा और पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है.