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संसद के बाद अब कृषि बिल को राष्ट्रपति ने दी मंजूरी, विपक्ष की अपील बेअसर

किसानों और राजनीतिक दलों के लगातार विरोध के बीच राष्ट्रपति ने मॉनसून सत्र में संसद से पास किसानों और खेती से जुड़े बिलों पर अपनी सहमति दे दी है. किसान और राजनीतिक दल इस विधेयकों को वापस लेने की मांग कर रहे थे.

कृषि बिल के विरोध में किसान लगातार कर रहे विरोध-प्रदर्शन (पीटीआई) कृषि बिल के विरोध में किसान लगातार कर रहे विरोध-प्रदर्शन (पीटीआई)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • मॉनसून सत्र में दोनों सदनों ने पास किए 3 कृषि बिल
  • तीनों विवादास्पद बिल अब कानून बन गए
  • किसानों ने विरोध में 25 सितंबर को किया था भारत बंद
  • विपक्ष ने राष्ट्रपति पर साइन नहीं करने का किया था अनुरोध
  • राष्ट्रपति की J-K आधिकारिक भाषा बिल पर भी सहमति

किसानों और राजनीतिक दलों के लगातार विरोध के बीच राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने आज रविवार मॉनसून सत्र में संसद से पास किसानों और खेती से जुड़े बिलों पर अपनी सहमति दे दी है. किसान और राजनीतिक दल इस विधेयकों को वापस लेने की मांग कर रहे थे लेकिन उनकी अपील किसी काम न आई. तीनों विवादास्पद बिल अब कानून बन गए हैं. साथ ही राष्ट्रपति ने J-K आधिकारिक भाषा बिल 2020 पर भी अपनी सहमति दे दी है.

केंद्र की मोदी सरकार में सहयोगी रही शिरोमणि अकाली दल भी इस बिल के विरोध में लगातार मुखर रही. संसद में बिल का विरोध किया, फिर केंद्र में मत्री रहीं हरसिमरत कौर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद सरकार के रवैये में कोई बदलाव नहीं देखने से नाराज अकाली दल ने खुद को अब एनडीए से भी अलग कर लिया. अकाली दल के अलावा कांग्रेस समेत कई अन्य दलों ने लगातार कृषि बिल का विरोध किया और राष्ट्रपति से गुजारिश भी की थी कि वो इस पर दस्तखत न करें, लेकिन उनकी अपील काम नहीं आई. 

21 सितंबर को राष्ट्रपति से मिलने के बाद, अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा था, 'हमने राष्ट्रपति से संसद में पारित किए गए किसान विरोधी बिलों पर हस्ताक्षर करने के खिलाफ अनुरोध किया. हमने उनसे उन बिलों को संसद में वापस भेजने का अनुरोध किया है.' राष्ट्रपति कोविंद ने संसद से पास हुए तीन कृषि बिल पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इसके साथ ही ये तीनों विवादास्पद बिल अब कानून बन गए हैं. 

इस बीच अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल ने सभी राजनीतिक दलों और संगठनों से अनुरोध किया है कि किसान और खेतीहर मजदूर के हित में प्रदर्शन करें. उन्होंने कहा, 'मैं सभी राजनीतिक दलों और संगठनों से आह्वान करता हूं कि वे देश के किसानों, कृषि श्रमिकों और कृषि उपज व्यापारियों के हितों की रक्षा करें. अकाली दल अपने आदर्शों से नहीं हटेगा. किसानों के कल्याण के लिए हमने बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए के साथ तोड़ दिया.' 

संसद के मॉनसून सत्र में लाए गए कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020, कृषक (सशक्तीकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 और आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक-2020 को पहले संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिल चुकी है. अब इस पर राष्ट्रपति की मुहर भी लग चुकी है. ये तीनों विधेयक कोरोना काल में पांच जून को घोषित तीन अध्यादेशों की जगह लेंगे.

राष्ट्रपति से मिले थे गुलाम नबी आजाद

इस बीच बुधवार को कांग्रेस सांसद गुलाम नबी आजाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलने पहुंचे. विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल की तरफ से गुलाम नबी आजाद राष्ट्रपति से मिले. आजाद ने राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद बताया कि उन्होंने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की है और कहा है कि सब राजनीतिक दलों से बात करके ही यह बिल लाना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से ये बिल न सेलेक्ट कमेटी को भेजा गया और न ही स्टैंडिंग कमेटी को भेजा गया. पांच अलग-अलग प्रस्ताव दिए गए थे. किसान बिलों को लेकर विपक्ष के जरिए लगातार प्रदर्शन किया जा रहा है. गुलाम नबी आजाद ने कहा कि किसान अपना खून-पसीना एक करके अनाज पैदा करते हैं. किसान देश की रीढ़ की हड्डी हैं. 

3 बिल संसद से पास

संसद के दोनों सदनों से 3 अहम कृषि विधेयकों के विरोध में विपक्ष में शामिल राजनीतिक दलों समेत किसान संगठनों द्वारा 25 सितंबर शुक्रवार को भारत बंद बुलाया गया था, जिसका सबसे ज्यादा असर उत्तर भारत, खासतौर से पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश में देखा गया. हालांकि, अन्य राज्यों में भी विपक्षी दलों और किसान संगठनों ने जगह-जगह प्रदर्शन किया.

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) का दावा है कि भारत बंद के दौरान शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा पूरी तरह बंद रहे. दोनों राज्यों में भाकियू के अलावा कई अन्य किसान संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी बंद का समर्थन दिया था.

पंजाब और हरियाणा में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल से जुड़े किसान संगठनों ने विधेयकों का विरोध किया.

किसानों को आजादी मिलीः PM मोदी

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज रविवार को सुबह 'मन की बात' के दौरान संसद में पास हुए तीन बिलों से किसानों को होने वाले लाभ के बारे में चर्चा की. उन्होंने बताया कि अब किसानों को अपनी उपज को देश में कहीं भी बेचने की आजादी मिली है. प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना काल में भी कृषि क्षेत्र के दमखम दिखाने की सराहना की.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो जमीन से जितना जुड़ा होता है, वो, बड़े से बड़े तूफानों से भी उतना अडिग रहता है. कोरोना के इस कठिन समय में हमारा कृषि क्षेत्र, हमारा किसान इसका जीवंत उदाहरण है. संकट के इस काल में भी हमारे देश के कृषि क्षेत्र ने फिर अपना दमखम दिखाया है.

प्रधानमंत्री ने कृषि बिलों को लेकर कहा कि फल-सब्जियों के अतिरिक्त किसान अपने खेत में, जो कुछ पैदा कर रहे हैं, धान, गेहूं, सरसों, गन्ना उसको अपनी इच्छा अनुसार जहां ज्यादा दाम मिले, वहीं पर बेचने की आजादी मिल गई है. 3-4 साल पहले ही महाराष्ट्र में फल और सब्जियों को एपीएमसी के दायरे से बाहर किया गया था. इस बदलाव ने महाराष्ट्र के फल और सब्जी उगाने वाले किसानों की स्थिति बदली है.

प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि इन किसानों के अपने फल-सब्जियों को कहीं पर भी, किसी को भी बेचने की ताकत है और ये ताकत ही उनकी इस प्रगति का आधार है.

विपक्षी के आरोपो के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बार-बार दोहराया कि किसानों से एमएसपी पर फसलों की खरीद पहले की तरह जारी रहेगी और इन विधेयकों में किसानों को एपीएमसी की परिधि के बाहर अपने उत्पाद बेचने को विकल्प दिया गया है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और किसानों को उनके उत्पादों का लाभकारी दाम मिलेगा.

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