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नॉर्वे में पांच देशों के प्रमुखों से मिले PM मोदी, डिफेंस समेत इन मुद्दों पर हुई बात

ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों में क्लीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटलाइजेशन, ग्रीन टेक्नोलॉजी, ब्लू इकॉनमी और निवेश बढ़ाने पर जोर दिया गया.

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प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्डिक देशों के समकक्षों के साथ डिफेंस, क्लीन एनर्जी, ट्रेड समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की. (Photo: X/@NarendraModi)
प्रधानमंत्री मोदी ने नॉर्डिक देशों के समकक्षों के साथ डिफेंस, क्लीन एनर्जी, ट्रेड समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा की. (Photo: X/@NarendraModi)

ओस्लो में आयोजित तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत के साथ नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड और स्वीडन के नेता शामिल हुए. अधिकारियों के मुताबिक यह शिखर सम्मेलन टेक्नोलॉजी, ग्रीन एनर्जी, ब्लू इकॉनमी, डिफेंस, स्पेस और आर्कटिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में भारत और नॉर्डिक देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देगा. प्रधानमंत्री मोदी 15 से 20 मई तक संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली की पांच देशों की यात्रा पर हैं. नॉर्वे के बाद वह अपने दौरे के अंतिम चरण में इटली जाएंगे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिखर सम्मेलन में आइसलैंड, फिनलैंड और डेनमार्क के प्रधानमंत्रियों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकें कीं. इन बैठकों में क्लीन एनर्जी, ट्रेड, डिजिटलाइजेशन और नई तकनीकों समेत कई अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई. मोदी ने आइसलैंड की प्रधानमंत्री क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टाडॉटिर के साथ बैठक के बाद सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि भारत आइसलैंड के साथ अपनी मित्रता को बेहद महत्व देता है. दोनों नेताओं ने क्लीन एनर्जी, मत्स्य पालन, जियोथर्मल एनर्जी, कार्बन कैप्चर और स्टोरेज जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की.

पीएम मोदी ने कहा कि ब्लू इकॉनमी से जुड़े क्षेत्रों में आइसलैंड की विशेषज्ञता सराहनीय है और भारत-ईएफटीए व्यापार एवं आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA) दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई गति देगा. विदेश मंत्रालय के मुताबिक यह प्रधानमंत्री फ्रॉस्टाडॉटिर के पद संभालने के बाद दोनों नेताओं की पहली मुलाकात थी. बातचीत में रिन्यूएबल एनर्जी, डिजिटल टेक्नोलॉजी, इनोवेशन, आर्कटिक सहयोग और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई.

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इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने फिनलैंड के प्रधानमंत्री पेटेरी ओर्पो के साथ बैठक में व्यापार और निवेश, डिजिटलीकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 5G और 6G तकनीक, क्वांटम टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी और सर्कुलर इकॉनमी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दोनों नेताओं ने एजुकेशन, इनोवेशन, मोबिलिटी और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श किया. दोनों पक्षों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते को जल्द लागू करने के महत्व पर भी जोर दिया.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वर्ष भारत और फिनलैंड के बीच कई महत्वपूर्ण संवाद हुए हैं और प्रधानमंत्री ओर्पो खुद एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेने भारत आए थे. विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों ने सितंबर 2026 में गुजरात के गांधीनगर में संयुक्त रूप से वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम आयोजित करने की भी घोषणा की. प्रधानमंत्री मोदी ने डेनमार्क की कार्यवाहक प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन के साथ भी बैठक की. बैठक के बाद मोदी ने कहा कि भारत-डेनमार्क संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं.

दोनों नेताओं ने रिन्यूएबल एनर्जी, क्लाइमेट चेंज, वाटर मैनेजमेंट, ग्रीन शिपिंग, डिजिटलाइजेशन और फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले वर्षों में फिनटेक, इंडस्ट्री, डिफेंस और इनोवेशन के क्षेत्रों में भी दोनों देशों के बीच बेहतर तालमेल देखने को मिल सकता है. उन्होंने डेनमार्क के पेंशन फंड्स को भारत में निवेश बढ़ाने के लिए आमंत्रित भी किया. विदेश मंत्रालय के मुताबिक दोनों देशों ने ग्रीन स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप के तहत संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई. दोनों नेताओं ने नई और उभरती तकनीकों, कम्युनिकेशन, स्टार्टअप, एजुकेशन और डिफेंस सेक्टर में सहयोग पर भी चर्चा की.

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वाटर मैनेजमेंट के क्षेत्र में भारत और डेनमार्क के बीच वाराणसी में 'स्मार्ट लेबोरेटरी ऑन क्लीन रिवर्स' स्थापित करने की संयुक्त पहल की भी समीक्षा की गई. यह परियोजना भारत सरकार, आईआईटी-बीएचयू और डेनमार्क सरकार की साझेदारी से संचालित की जा रही है. नॉर्डिक देशों में डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन शामिल हैं. इन पांच देशों की संयुक्त जीडीपी 1.9 ट्रिलियन डॉलर से अधिक है और ये देश रिन्यूएबल एनर्जी, सस्टेनेबल मरीन मैनेजमेंट के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर अग्रणी माने जाते हैं.

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