अमेरिका, यूरोप और इजराइल की तरह भारत की आतंकवाद-रोधी यूनिट राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) को भी शिकारी कुत्ते बेल्जियन मैलिनोइस मिलने जा रहे हैं. ये लैब्राडोर स्क्वाड की जगह लेंगे. एनएसजी को उम्मीद है कि वो जल्द ही आने वाले बेल्जियन मैलिनोइस नस्ल के कुत्तों को अपने लड़ाकू बल के रूप में शामिल करेगी. बेल्जियन मैलिनोइस कुत्तों को ज्यादा समझदार और बेहद क्रूर आक्रामक माना जाता है. ये कुत्ते अपने जासूसी कौशल के लिए भी पहचाने जाते हैं. ट्रेंड बेल्जियन मैलिनोइस अपने मिशन को पूरा करने में भी माहिर होते हैं.
बताते चलें कि लैब्राडोर कुत्तों का इस्तेमाल सूंघने और ट्रैक करने के लिए किया जाता था. वहीं, जर्मन शेफर्ड कुत्तों का इस्तेमाल हमला करने के लिए किया जाता था. K-9 स्क्वाड के कुत्ते एनएसजी कमांडो के साथ हर कदम पर साथ चलते हैं. ये कुत्ते सुबह 4 बजे से ट्रेनिंग लेते हैं. इनकी दिनचर्या भी काफी कठिन होती है. अमेरिकी सेना को भी मैलिनोइस डॉग्स के जरिए पाकिस्तान में लादेन के ठिकाने का सुराग हाथ लगा था.
'क्या हैं इस नस्ल के कुत्ते की खूबियां?'
जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड अपने लैब्राडोर दस्ते को ज्यादा आक्रामक और सतर्क बेल्जियन मैलिनोइस कुत्तों से बदलने जा रहा है. एनएसजी अपने मैलिनोइस कुत्तों को सूंघना, ट्रैक करना और हमला करना तीनों काम करने के लिए प्रशिक्षित कर रही है. एनएसजी ने 2016 में पठानकोट में एक ऑपरेशन के दौरान बहादुरी दिखाने के लिए बेल्जियन मैलिनोइस को सेना पदक देने की सिफारिश की थी. बेल्जियन मैलिनोइस कुत्ते ना सिर्फ पशुपालन में, बल्कि संरक्षण और कानून प्रवर्तन, दवा, बम और गैस का पता लगाने, खोज और बचाव ट्रैकिंग, बुजुर्ग लोगों को चिकित्सा सहायता में भी बेहतर होते हैं. इसे एक अनुभवी मालिक की जरूरत होती है.
'सेना के लिए मददगार साबित होते हैं'
हाल ही में इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के दौरान बेल्जियन मैलिनोइस नस्ल के कुत्ते बड़े मददगार के तौर पर उभरे हैं. युद्ध के बीच इजरायली बलों ने बेल्जियन मैलिनोइस को विशेष रूप से ट्रेंड किया था. इन कुत्तों ने गाजा में सूंघकर ना सिर्फ भूमिगत सुरंगों का पता लगाया था, बल्कि हमास के आतंकवादियों तक भी पहुंच गए थे. उन्हें ट्रैक करने और दुश्मन पर हमला करने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाता है. फिलहाल, यह इजरायल की सबसे महत्वपूर्ण लड़ाकू यूनिट में से एक माने जाते हैं.
'अगस्त 2023 से ट्रेनिंग चल रही है'
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि मैलिनोइस स्क्वायड एनएसजी के ब्लैक कैट कमांडो को बंधक स्थितियों समेत उनके आतंकवाद विरोधी अभियानों में मदद करेगा. एनएसजी के महानिदेशक एमए गणपति ने कहा, हमें कुत्तों के दो सेट, उनके ट्रेनर्स और अन्य लॉजिस्टिक के साथ ले जाना होगा. यह गतिशीलता और गोपनीयता को प्रभावित करता है. एनएसजी की K9 कैनाइन यूनिट के प्रभारी लेफ्टिनेंट कर्नल आरबी शर्मा ने कहा, नए शामिल कुत्तों के लिए प्रशिक्षण अगस्त 2023 में शुरू हुआ और दस्ता अब पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित है.
'लैब्राडोर की जगह लेंगे मैलिनोइस'
लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा ने कहा, दस्ते में वर्तमान में कुत्तों की तीन नस्लें हैं - लैब्राडोर, कॉकर स्पैनियल और बेल्जियन मैलिनोइस. वर्तमान में हमारे पास 20 लैब्राडोर (4-7 वर्ष आयु वर्ग के) हैं. हम और ज्यादा लैब्राडोर नहीं मंगा रहे हैं. क्योंकि हम उन्हें धीरे-धीरे रिटायर करने की योजना बना रहे हैं. उनके स्थान पर हमने 14 बेल्जियन मैलिनोइस का अधिग्रहण किया है और वे अब हमारे प्रमुख कुत्ते दस्ते हैं. बेल्जियन मैलिनोइस दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सेनाओं की पसंदीदा नस्ल है. उन्होंने आगे कहा, अमेरिकी सेना भी बेल्जियन मैलिनोइस नस्ल के कुत्तों की मदद से पाकिस्तान में अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन तक पहुंची थी और मार गिराने में सफलता मिली थी.
'नाटो देशों के पास भी मैलिनोइस कुत्ते'
2019 में बेल्जियम के एक मैलिनोइस ने अमेरिका के नेतृत्व में एक सैन्य अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर पश्चिमी सीरिया में भगोड़े इस्लामिक स्टेट नेता अबू बक्र अल-बगदादी की मौत हो गई थी. नाटो सैनिकों द्वारा भी इस नस्ल के कुत्तों को अपनी सैन्य यूनिट में रखा गया है.
'बेहद समझदार होते हैं मैलिनोइस'
लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा ने कहा, लैब्राडोर के विपरीत जिनके पास बहुत अच्छी समझ होती है, लेकिन वे विनम्र होते हैं. मैलिनॉइस की सूंघने की क्षमता थोड़ी कम होती है. हालांकि, आतंकवादियों पर हमला करने और उन्हें विस्फोटक सामग्री निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं. ये अधिक सतर्कता बरतते हैं, जिससे सुरक्षा बल को पॉजिशन लेन का वक्त मिल जाता है और दुश्मन को ढेर करने में मदद मिलती है. इस नस्ल को 1800 के दशक में बेल्जियम के मालिंस क्षेत्र में विकसित किया गया था.
'फुर्तीले और पेशेवर होते हैं मैलिनोइस'
लेफ्टिनेंट कर्नल शर्मा कहते हैं कि चूंकि लैब्राडोर बहुत आसानी से थक जाते हैं और ऑपरेशन के दौरान चंचल हो सकते हैं. इनके साथ ऐसा नहीं है. लैब्राडोर लगातार स्नेह की तलाश में रहते हैं और अपने मालिकों को खुश करने के लिए उत्सुक रहते हैं. जबकि मैलिनोइस अधिक पेशेवर होते हैं. एनएसजी के सेकेंड-इन-कमांड मेजर और मुख्य ट्रेनर्स ऋषि ने कहा, मैलिनोइस अन्य नस्लों की तुलना में कहीं अधिक फुर्तीले हैं और उन्हें बेहतर प्रशिक्षित भी किया जा सकता है.