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कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर बड़ा ब्रेक! पढ़ाई बीच में छोड़ने पर लौटानी होगी पूरी फीस

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग (एनसीडीआरसी) ने कोचिंग संस्थानों को फीस जब्त करने वाली शर्त को गैरकानूनी बताया है. आयोग ने कहा है कि छात्र को सेवा न मिलने पर एडवांस शुल्क जब्त नहीं किया जा सकता है.

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FITJEE की अपील की गई रद्द (File Photo: ITG)
FITJEE की अपील की गई रद्द (File Photo: ITG)

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने कोचिंग और शैक्षणिक संस्थानों की फीस मनमानी पर रोक लगाते हुए फैसला सुनाया है. हाल ही में आयोग ने यह निर्णय दिया है. शीर्ष उपभोक्ता अदालत ने यह आदेश दिया है. फैसले में कहा गया है कि बीच में पढ़ाई छोड़ने या कोचिंग इंस्टीट्यूट की ओर से कोचिंग में बाधा आने पर संस्थान को पूरे साल या पाठ्यक्रम की बची हुई फीस लौटानी होगी. वे छात्रों को फीस लौटाने से इनकार नहीं कर सकते. आयोग ने साफ किया है कि फीस जब्त करने की शर्त गैरकानूनी और अमान्य है.

शीर्ष उपभोक्ता अदालत ने कोचिंग संस्थान फिटजी लिमिटेड की अपील को खारिज कर दिया है. यह अपील राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एसडीआरसी) के फैसले के खिलाफ दायर की गई थी. आयोग ने फिटजी से दो माह में आदेश का पालन करने पर छह फीसदी और इससे ज्यादा समय लेने पर 9 फीसदी ब्याज के साथ भुगतान करने को कहा है. 

NCDRC ने कहा कि एडमिशन लेने के 10 दिन बाद ही क्लास में जाना बंद कर देने वाले छात्र को एडवांस जमा कराई गई फीस वापस करने से इनकार करना कतई उचित नहीं था.

फीस लेने की शर्त अनुचित व्यापार व्यवहार...

राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने कहा है कि प्रशिक्षण संस्थान, कोचिंग सेंटर या शैक्षणिक केंद्र सेवा प्रदाता हैं. आयोग की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि अगर किसी छात्र ने सेवा का लाभ नहीं उठाया है, तो अग्रिम रूप से ली गई फीस जब्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है. शीर्ष उपभोक्ता अदालत ने एडमिशन के वक्त की उस शर्त को भी गैरकानूनी और अमान्य बताया है, जिसमें कोचिंग या पढ़ाई अधूरी छोड़ने पर पूरा शुल्क जब्त करने की बात कही गई है. ऐसी शर्त अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आती है.

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सेवा में कमी मिलने पर छात्र छोड़ सकता है संस्थान

आयोग ने कहा कि अगर किसी छात्र या प्रशिक्षु को सेवा में कमी और समुचित या दावे के मुताबिक फायदा नहीं मिलने का पता चलता है, तो वह बीच में ही संस्थान छोड़ सकता है. इसके बाद संस्थान को बची हुई फीस लौटानी होगी. इस मामले में छात्र ने तेलंगाना राज्य के इंटरमीडिएट बोर्ड से एम.पी.सी. (MPC) विषयों के साथ प्रथम वर्ष में प्रवेश लिया था. छात्र ने दो वर्षों (2017-2019) के पूरे पाठ्यक्रम के लिए पहली जनवरी 2017 से अग्रिम कुल शुल्क 3,47,166 रुपये जमा किए थे. छात्र को दस दिन में ही संस्थान छोड़ना पड़ा था, क्योंकि उसकी दलील थी कि कक्षा में शिक्षक ने अपमानजनक टिप्पणियां की थीं.

निचली अदालत का आदेश...

एनसीडीआरसी ने कोचिंग संस्थान की अपील खारिज करते हुए कहा कि राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले में हस्तक्षेप करने की कोई वजह नहीं है और यह एक आदेश है. राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपीलकर्ता कोचिंग संस्थान को भुगतान की गई कुल रकम से पहले पहले सेमेस्टर की फीस ₹86,788.75 काटकर बाकी शेष राशि ₹2,60,375 को 6% ब्याज के साथ वापस करने का आदेश दिया था. इसके अलावा मानसिक पीड़ा के लिए ₹5,000 और मुकदमेबाजी लागत के रूप में ₹3,000 अतिरिक्त अदा करने का आदेश भी दिया गया था.

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