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बेटी बचाओ सफल, लेकिन बेटी पढ़ाओ फेल... पुरुषों से ज्यादा आबादी हुई, पर 30% महिलाएं अब भी शिक्षा से दूर

NFHS-5 के आंकड़े बताते हैं कि आज भी देश में 41% महिलाएं ही ऐसी हैं जिन्हें 10 साल से ज्यादा स्कूली शिक्षा मिली है. यानी 59% महिलाएं 10वीं से आगे पढ़ ही नहीं सकी हैं.

71 फीसदी महिलाएं ही साक्षर (फाइल फोटो) 71 फीसदी महिलाएं ही साक्षर (फाइल फोटो)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • ग्रामीण इलाकों में 33.7% महिलाएं ही 10वीं से आगे पढ़ीं
  • 33.3% महिलाओं तक ही इंटरनेट की पहुंच

जनवरी 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा दिया था. इसका मकसद ये था कि कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सके और बेटियों को पढ़ाया जा सके. हालांकि, बेटी बचाओ तो सफल हुआ है, लेकिन 'बेटी पढ़ाओ' फेल दिखाई दे रहा है. वो इसलिए क्योंकि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) के आंकड़ों के मुताबिक, देश में पहली बार महिलाओं की आबादी पुरुषों से ज्यादा हुई है. 

इन आंकड़ों के मानें तो देश में अब हर 1 हजार पुरुषों पर 1,020 महिलाएं हैं. इससे पहले 2015-16 में हुए NFHS-4 में ये आंकड़ा हर 1,000 पुरुषों पर 991 महिलाओं का था. NFHS-5 के आंकड़ों में ये भी निकलकर सामने आया है कि सेक्स रेशियो में सुधार शहरों की तुलना में गांवों में ज्यादा बेहतर हुआ है. गांवों में हर 1,000 पुरुषों पर 1,037 महिलाएं हैं, जबकि शहरों में 985 महिलाएं हैं.

देश में भले ही प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या बढ़ गई हो, लेकिन अभी भी उनकी स्थिति बहुत बेहतर नहीं हुई है. सर्वे के मुताबिक, 71.5% महिलाएं ही साक्षर हैं. NFHS-5 के ही आंकड़े ये भी बताते हैं कि आज भी देश में 41% महिलाएं ही ऐसी हैं जिन्हें 10 साल से ज्यादा स्कूली शिक्षा मिली है. यानी 59% महिलाएं 10वीं से आगे पढ़ ही नहीं सकीं हैं. ग्रामीण इलाकों में तो 33.7% महिलाएं ही 10वीं से आगे पढ़ सकीं हैं. 

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महिलाओं को लेकर ये आंकड़े भी चौंकाते हैं...

- 20 से 24 साल की 23.3% महिलाएं ऐसी हैं जिनकी शादी 18 साल से पहले हो गई थी. 

- 18 से 49 साल की 29.3% महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने अपने जीवन में कभी न कभी पति की प्रताड़ना झेली है.

- 18 से 49 साल की 3.1% महिलाएं ऐसी हैं जिन्होंने प्रेग्नेंसी के दौरान शारीरिक हिंसा को झेला है.

-  आज भी सिर्फ 33.3% महिलाओं तक ही इंटरनेट की पहुंच है. केवल 54% महिलाओं के पास ही अपना फोन है.

लेकिन ये आंकड़े सुकून देने वाले...

- 78.6% महिलाओं के पास अपना बैंक अकाउंट है. 2015-16 में ऐसी 53% महिलाएं ही थीं.

- 43.3% महिलाओं के नाम पर कोई न कोई प्रॉपर्टी है, जबकि 2015-16 में ये आंकड़ा 38.4% था.

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