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मिडिल ईस्ट की जंग और ईरान को लेकर जयशंकर ने संसद में क्या कुछ कहा, 10 बड़ी बातें

विदेश मंत्री जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में पश्चिम एशिया की स्थिति पर एक महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि खाड़ी देश भारत के साथ सालाना 200 बिलियन डॉलर का व्यापार करते हैं. जयशंकर ने कहा कि यह क्षेत्र हमारी ऊर्जा सुरक्षा (तेल और गैस सप्लाई) के लिए महत्वपूर्ण है और भारत अपने उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है.

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विदेश मंत्री ने मिडिल ईस्ट की स्थिति पर दिया जवाब. (photo: ITG)
विदेश मंत्री ने मिडिल ईस्ट की स्थिति पर दिया जवाब. (photo: ITG)

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राज्यसभा में ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर बयान देते हुए कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्र में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है. उन्होंने बताया कि ईरान से भारतीयों को अर्मेनिया के रास्ते निकाला गया है और प्रधानमंत्री मोदी ने खाड़ी देशों के नेताओं से बात की है.

उन्होंने बताया कि भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समाधान की अपील की है. सरकार ने फंसे हुए भारतीयों की सुरक्षित वापसी के लिए 114 उड़ानें संचालित की हैं और कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. यहां जानें विदेश मंत्री के बयान की 10 बड़ी बातें...

मैं इस सम्मानित सदन को पश्चिम एशिया में हुए हालिया घटनाक्रमों से अवगत कराने के लिए खड़ा हुआ हूं. 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए इस संघर्ष में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई के साथ खाड़ी देशों पर हमले हुए हैं. इसमें ईरान के नेतृत्व स्तर पर हताहत हुए हैं और क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है. सरकार ने शुरू से ही सभी पक्षों से संयम बरतने, वृद्धि रोकने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है.

संवाद- कूटनीति पर जोर

भारत का मानना है कि तनाव कम करने और मूल मुद्दों को सुलझाने के लिए संवाद और कूटनीति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए. 28 फरवरी को जारी बयान में गहरी चिंता जताई गई थी और 3 मार्च को फिर से संवाद की अपील की गई. जयशंकर ने कहा कि सदन सभी पक्षों के साथ जीवन हानि पर दुख व्यक्त करता है.

सीसीएस की बैठक

विदेश मंत्री ने बताया कि मिडिल ईस्ट के ताजा हालातों पर एक मार्च को प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में CCS की बैठक हुई, जिसमें ईरान पर हवाई हमलों और खाड़ी देशों पर हमलों की जानकारी दी गई. भारतीय समुदाय की सुरक्षा, क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रभाव और यात्रियों/छात्रों की समस्याओं पर फोकस किया गया. सभी मंत्रालयों को निर्देश दिए गए और पीएम खुद स्थिति पर नजर रखे हुए हैं.

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उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया भारत का पड़ोसी क्षेत्र है, जहां करीब एक करोड़ भारतीय काम करते हैं, ईरान में कुछ हजार छात्र/कर्मचारी हैं. ये पूरा इलाका भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, जहां तेल-गैस के बड़े आपूर्तिकर्ता हैं.

उन्होंने बताया कि खाड़ी क्षेत्र हमारा एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है, जिससे हम प्रतिवर्ष लगभग 200 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार करते हैं और पिछले कई दशकों में इस क्षेत्र से भारत में बड़े निवेश हुए हैं.

जयशंकर ने दुख जताते हुए बताया कि व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों में अब तक दो भारतीय नाविकों की मौत हो चुकी है और एक अभी भी लापता है. इन जहाजों के क्रू में अक्सर बड़ी संख्या में भारतीय होते हैं.स्थिति को देखते हुए डायरेक्टरेट जनरल ऑफ Shipping (DGS) ने 2 मार्च को एक 'क्विक रिस्पॉन्स टीम' का गठन किया है. ये टीम प्रभावित नाविकों और उनके परिवारों की सहायता के लिए 24 घंटे काम कर रही है.

'भारतीय नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा'

उन्होंने बताया कि वो जून 2025 के 12 दिवसीय युद्ध के बाद से ही स्थिति पर नजर रखे हुए थे. जनवरी 2026 में ही भारतीयों को ईरान की गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई थी. 14 फरवरी को तेहरान स्थित दूतावास ने छात्रों, पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को उपलब्ध साधनों से ईरान छोड़ने के लिए कहा था. हालांकि, विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि कई लोगों ने इन चेतावनियों को नजरअंदाज किया और वहीं रुके रहे. अब युद्ध शुरू होने के बाद उन्हें निकालने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं.

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114 फ्लाइट्स से भारतीयों की वापसी

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि फंसे हुए यात्रियों और छात्रों को निकालने के लिए सरकार नागरिक उड्डयन मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रही है. जयशंकर ने आंकड़ों के जरिए बताया कि 7 मार्च को 15 उड़ानें, 8 मार्च को 49 उड़ानें और आज 9 मार्च को 50 उड़ानें भारत पहुंची हैं. दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे ट्रांजिट हब में फंसे यात्रियों की मदद के लिए भारतीय राजनयिक जमीन पर काम कर रहे हैं. कई मामलों में सड़क मार्ग से सीमा पार कराकर भी भारतीयों को सुरक्षित निकाला जा रहा है.

कूटनीतिक मोर्चा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं इस स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इजरायल के राष्ट्राध्यक्षों से फोन पर बात की है. इन सभी देशों ने आश्वासन दिया है कि भारतीय समुदाय की भलाई उनकी प्राथमिकता होगी. विदेश मंत्री भी लगातार अपने समकक्षों के संपर्क में हैं. हालांकि, उन्होंने माना कि वर्तमान परिस्थितियों में ईरान के नेतृत्व के साथ संपर्क साधना कठिन हो रहा है, फिर भी बातचीत जारी है.

ईरान ने जताया आभार

विदेश मंत्री ने सदन को एक महत्वपूर्ण जानकारी दी कि कोच्चि बंदरगाह पर एक ईरानी जहाज 'IRIS LAVAN' खड़ा है. ईरान ने 28 फरवरी को तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाहों पर रुकने की अनुमति मांगी थी, जिसे 1 मार्च को स्वीकार कर लिया गया. जहाज का क्रू फिलहाल भारतीय नौसेना की सुविधाओं में है. जयशंकर ने इसे एक 'मानवीय कदम' बताते हुए कहा कि ईरानी विदेश मंत्री ने इसके लिए भारत का आभार व्यक्त किया है.

संबोधन के अंत में जयशंकर ने भारत के दृष्टिकोण के तीन मार्गदर्शक कारक बताए. पहला, भारत शांति के पक्ष में है और बातचीत की वापसी चाहता है. दूसरा, क्षेत्र में भारतीय समुदाय की भलाई और सुरक्षा सर्वोपरि है. तीसरा, भारत के राष्ट्रीय हित, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार प्रवाह शामिल है, हमेशा सर्वोपरि रहेंगे. उन्होंने विश्वास जताया कि इन संवेदनशील मुद्दों पर पूरे सदन का सरकार को समर्थन प्राप्त है.

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