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मणिपुर हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अवमानना याचिका, कही ये बात

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की अवकाश पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि आरोप उत्तरदाताओं के खिलाफ अवमानना का मामला नहीं बनता है, जिसमें मणिपुर के मुख्य सचिव भी शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं को कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी उपायों की तलाश करने की सलाह दी गई.

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सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)
सुप्रीम कोर्ट. (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह भावनाओं के आधार पर नहीं चल सकता और उसे कानून के अनुसार काम करना होगा. कोर्ट ने मणिपुर हिंसा में विस्थापित लोगों की संपत्तियों की सुरक्षा पर शीर्ष अदालत के आदेश का कथित तौर पर पालन न करने पर अवमानना ​​कार्रवाई की मांग करने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल की पीठ ने कहा कि वह इस तर्क से संतुष्ट नहीं हैं कि मणिपुर के मुख्य सचिव समेत प्रतिवादियों के खिलाफ अवमानना ​​का मामला बनाया गया है और याचिकाकर्ता कानून के तहत उपलब्ध समाधान का सहारा ले सकते हैं. 

शुक्रवार को सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की अवकाश पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि आरोप उत्तरदाताओं के खिलाफ अवमानना का मामला नहीं बनता है, जिसमें मणिपुर के मुख्य सचिव भी शामिल हैं. याचिकाकर्ताओं को कानून के तहत उपलब्ध अन्य कानूनी उपायों की तलाश करने की सलाह दी गई. मणिपुर का प्रतिनिधित्व करने वाली अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ के समक्ष तर्क दिया कि राज्य सरकार और केंद्रीय अधिकारी जनता की चिंताओं को दूर करने और व्यवस्था बनाए रखने के लिए जमीन पर सक्रिय रूप से लगे हुए हैं. भाटी ने इन कार्यों को खेदजनक बताते हुए कुछ दलों द्वारा  ये कोशिश की जा रही है, हालात तनावपूर्ण बने रहें, जो कि बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

पीठ ने कथित अवमानना की बारीकियों के बारे में पूछताछ की. इसके साथ ही खास तौर पर मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों की संलिप्तता पर सवाल उठाया, जिन्हें संबंधित संपत्तियों का प्रत्यक्ष अतिक्रमणकर्ता नहीं माना गया था. याचिकाकर्ताओं के वकील द्वारा उनकी संपत्तियों की सुरक्षा और स्थानीय कानून प्रवर्तन की अप्रभावीता के बारे में दलीलों के बावजूद, अदालत ने कहा कि इससे उच्च-स्तरीय अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​नोटिस जारी करना उचित नहीं है.

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भाटी ने पिछले वर्ष के 25 सितंबर के अदालत के आदेश का हवाला दिया, जिसमें राज्य और केंद्र सरकार को विस्थापित व्यक्तियों की संपत्तियों की सुरक्षा और अतिक्रमण को रोकने के उद्देश्य से निर्देशों का जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय दिया गया था. उन्होंने अपने नागरिकों और उनकी संपत्तियों की सुरक्षा के लिए राज्य की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और एक अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने की पेशकश की. चर्चा में मणिपुर में मौजूदा असहज शांति पर भी चर्चा हुई, जिसमें भाटी ने कहा कि राज्य और केंद्र दोनों सरकारें परस्पर विरोधी हितों को संतुलित करने और शांति सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही हैं.

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