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LPG सप्लाई संकट: कैंटीन मेनू बदलने पर मजबूर हुईं IT कंपनियां, कर्मचारियों को टिफिन लाने की सलाह

ईरान युद्ध का असर अब भारत के कॉर्पोरेट दफ्तरों तक पड़ने लगा है. कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच देश की कई बड़ी IT कंपनियों को अपने कैंटीन और कैफेटेरिया के मेनू में कटौती करनी पड़ी है.

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LPG कमी से जूझ रहे कॉर्पोरेट किचन, इंडक्शन और सैंडविच मेकर से चला रहा काम. (File Photo: ITG)
LPG कमी से जूझ रहे कॉर्पोरेट किचन, इंडक्शन और सैंडविच मेकर से चला रहा काम. (File Photo: ITG)

वेस्ट एशिया में जारी संघर्ष का असर अब भारत के कॉर्पोरेट कैंपस तक पहुंच गया है. कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच कई बड़ी IT कंपनियों ने अपने कैंटीन मेनू में कटौती कर दी है. कुछ जगहों पर सिर्फ दाल-चावल तक सीमित भोजन मिल रहा है, जबकि कई कुकिंग काउंटर अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं.

कैंपस आ रहे हजारों कर्मचारियों के लिए फिलहाल 'फ्यूचर ऑफ वर्क' का मतलब सीमित मेनू, सलाद और नाश्ते तक सिमट गया है. कंपनियां गैस की कमी से निपटने के लिए अपने किचन में इंडक्शन स्टोव, ग्रिल और सैंडविच मेकर जैसे बिजली से चलने वाले विकल्पों का सहारा ले रही हैं. इतना ही नहीं कई कंपनियों में वर्क फ्रॉम होम दिया जा रहा है.

पिछले हफ्ते इंफोसिस ने पुणे, बेंगलुरु और चेन्नई में काम कर रहे कर्मचारियों को ईमेल भेजकर स्थिति की जानकारी दी है. कंपनी ने बताया कि कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण कैंटीन का मेनू सीमित रहेगा.

इसके साथ ही कर्मचारियों को सलाह दी गई कि वे घर से अपना खाना लेकर ऑफिस आएं. कंपनी ने यह भी कहा कि कुछ खाने की चीजें बाहर के किचन से मंगाई जाएंगी. ऑमलेट और डोसा जैसे व्यंजन बनाने वाले कुकिंग काउंटर अगली सूचना तक अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं.

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HCL ने दिया वर्क फ्रॉम होम

एचसीएल ने चेन्नई में अपने कर्मचारियों को 12 और 13 मार्च को घर से काम करने का विकल्प दिया. इसकी वजह यह बताई गई कि कमर्शियल LPG सिलेंडर की सप्लाई में भारी कमी के कारण कई कैफेटेरिया वेंडर काम नहीं कर पा रहे थे. गैस की कमी का सीधा असर कैंपस में मिलने वाले खाने पर पड़ रहा है, जिससे सामान्य तरीके से कैफेटेरिया चलाना मुश्किल हो गया है.

TCS कैंपस में सीमित मेनू

टीसीएस के पुणे कैंपस में भी स्थिति अलग नहीं है. कर्मचारियों को सलाह दी गई कि वे अपना टिफिन साथ लाकर ऑफिस आएं, क्योंकि कैंटीन में खाने के विकल्प काफी कम कर दिए गए हैं. एक कर्मचारी ने बताया कि शुक्रवार तक कैंटीन में सिर्फ दाल-चावल ही उपलब्ध था. बेंगलुरु कैंपस की कैंटीन में खाने के लिए केवल लेमन राइस और सैंडविच मिल रहे थे.

कॉग्निजेंट में काउंटर बंद

कॉग्निजेंट कंपनी के पुणे कैंपस में भी कई बदलाव किए गए हैं. यहां दक्षिण भारतीय व्यंजन, पुलाव, पाव भाजी और अन्य चीजें परोसने वाले काउंटर अगली सूचना तक बंद कर दिए गए हैं. कर्मचारियों के लिए सिर्फ राइस प्लेट की सुविधा उपलब्ध है. कंपनी उन कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था पर भी विचार कर रही है, जिनका काम बहुत जरूरी श्रेणी में नहीं है.

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विप्रो कैंपस में भी असर

विप्रो के हिंजेवाड़ी कैंपस में भी कैफेटेरिया की व्यवस्था प्रभावित हुई है. यहां फास्ट फूड और चाइनिज फूड परोसने वाले काउंटर अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं. यहां भी कर्मचारियों को फिलहाल सिर्फ राइस प्लेट ही मिल रही है. इसके साथ ही कैफेटेरिया वेंडरों का काम भी गैस की कमी के कारण प्रभावित हुआ है.

यहां भी दिख रहा असर

LPG सप्लाई की कमी का असर सिर्फ IT कंपनियों तक सीमित नहीं है. दिल्ली हाई कोर्ट के वकीलों की कैंटीन ने भी अस्थायी तौर पर अपने मेन कोर्स वाले व्यंजन हटा दिए हैं. यहां अब सिर्फ वही चीजें परोसी जा रही हैं जिन्हें पकाने में बहुत कम मेहनत लगती है या जिन्हें बिना गैस के भी तैयार किया जा सकता है, जैसे सैंडविच और सलाद.

वैकल्पिक तरीकों से काम

जानकारी के मुताबिक, IIT बॉम्बे ने भी खाना पकाने वाली गैस बचाने के लिए अपने हॉस्टल मेस के मेन्यू में बदलाव किया है. इस तरह LPG सिलेंडर की सप्लाई को लेकर बनी अनिश्चितता का असर अब दफ्तरों, संस्थानों और कैंपसों तक पहुंच चुका है. कंपनियां और संस्थान फिलहाल वैकल्पिक तरीकों से काम चलाने की कोशिश में लगे हुए हैं.

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