लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने सोमवार को केंद्र सरकार के साथ संवाद में हो रही देरी पर गहरी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि नजरबंदी खत्म होने के एक महीने बाद भी बातचीत की अगली तारीख तय न होने से लद्दाख क्षेत्र में विश्वास और अविश्वास के बीच झूल रहा है और कुछ संदिग्ध तत्व लेह-कारगिल (बौद्ध-मुस्लिम) विभाजन के बीज बो रहे हैं.
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इस संवेदनशील क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए समय पर कदम उठाने की अपील की है.
'संवाद की प्रक्रिया ठप'
सोनम वांगचुक ने एक्स पर कहा कि उनकी नजरबंदी खत्म हुए आज ठीक एक महीना हो गया है. सरकार के आदेश ने आपसी विश्वास बनाने और सार्थक बातचीत की उम्मीद दी थी, लेकिन 4 फरवरी के बाद से संवाद की प्रक्रिया ठप पड़ी है. आखिरी बैठक 2.5 महीने बीत जाने के बाद भी अगले दौर की बैठक की कोई तारीख घोषित नहीं की गई है. इस लंबे अंतराल ने लद्दाख के लोगों में मोहभंग और असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है.
वांगचुक ने चेतावनी दी कि बातचीत में हो रही इस देरी का फायदा कुछ संदिग्ध संस्थाएं उठा रही हैं. ये संस्थाएं लेह और कारगिल के बीच बौद्ध-मुस्लिम विभाजन के बीज बोने का प्रयास कर रही हैं.
उन्होंने केंद्र को सचेत किया कि सीमावर्ती क्षेत्र में इस तरह का सामाजिक बिखराव राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है. हालांकि, देरी के कारण सीमावर्ती क्षेत्र के लोग निराश हो रहे हैं और कुछ तत्व लेह-कारगिल के बीच धार्मिक विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से इस संवेदनशील क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने के लिए समय पर कदम उठाने की अपील की है.
बता दें कि 14 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने सोनम वांगचुक की नजरबंदी तुरंत रद्द कर दी थी. गृह मंत्रालय ने कहा था कि ये कदम लद्दाख में शांति, स्थिरता और म्यूचुअल ट्रस्ट बनाने तथा सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है.
गृह मंत्रालय के अनुसार, सितंबर 2025 में लेह में कानून-व्यवस्था बिगड़ने के बाद वांगचुक को हिरासत में लिया गया था. सरकार ने उनकी रिहाई के वक्त शांति और स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई थी. हालांकि, वांगचुक का कहना है कि जब तक उच्च-स्तरीय समिति के माध्यम से ठोस चर्चा नहीं होती, तब तक लोगों की आकांक्षाएं पूरी नहीं होंगी.