राजधानी दिल्ली में आयोजित हो रहे इंडिया टुडे कॉन्क्लेव-2026 के मंच पर शुक्रवार को केरल से कांग्रेस के सांसद और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने शिरकत की. इस दौरान उन्होंने कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर सवालों के जवाब दिए साथ ही पार्टी को लेकर अपनी जवाबदेही की जिम्मेदारी पर भी बात की.
मंच पर बातचीत की शुरुआत में कहा गया कि राहुल गांधी को कांग्रेस का चेहरा और नेता माना जाता है, लेकिन उनके पीछे असली रणनीतिक ताकत कौन है? केसी वेणुगोपाल वह शख्स हैं, जिन पर आलोचक हर चुनावी हार का ठीकरा फोड़ते हैं. जब भी कांग्रेस कोई चुनाव हारती है तो आरोप उन्हीं पर लगते हैं. लेकिन उनके समर्थक कहते हैं कि जब कई नेता हवा का रुख देखकर फैसले लेते हैं, उस समय यह एक ऐसे व्यक्ति हैं जो पूरी तरह कांग्रेस की विचारधारा और संगठन के प्रति समर्पित हैं.
'कांग्रेस में नहीं दूसरे ताकतवर व्यक्ति की कोई परिभाषा'
इस तरह की बात पर कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा- यह जो कहा जा रहा था वह थोड़ा मजाक जैसा था, क्योंकि कांग्रेस दूसरे सबसे ताकतवर व्यक्ति जैसी कोई परिभाषा ही नहीं है.
उन्होंने कहा कि, 'मैं संगठन का महासचिव हूं. संगठन से जुड़े सभी फैसले स्वाभाविक रूप से मेरे जरिये से गुजरते हैं. अगर कोई कांग्रेस अध्यक्ष से मिलता है या राहुल गांधी से मिलता है, तो वे आगे की जानकारी के लिए संगठन महासचिव से बात करने को कहते हैं. इसमें गलत क्या है?
हमारे यहां निर्णय लेने की एक व्यवस्था है. अंतिम निर्णय नेतृत्व लेता है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी से भी सलाह लेते हैं और कभी-कभी सोनिया गांधी से भी. लेकिन उन फैसलों को आगे बढ़ाने और लागू करने की प्रक्रिया मेरी जिम्मेदारी होती है.
बातचीत के सिलसिले में सवाल पूछा गया कि, कांग्रेस कोई चुनाव हारती है तो आरोप आप पर (केसी वेणुगोपाल पर) लगते हैं. 2024 में ऐसा लगा कि कांग्रेस ने खुद को फिर से खड़ा कर लिया है. लोकसभा में कांग्रेस को 99 सीटें मिलीं और ऐसा लगा कि विपक्ष मजबूत हो रहा है. लेकिन उसके बाद कांग्रेस ने हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में लगातार चुनाव हार दिए. क्या आप इसकी जिम्मेदारी लेते हैं? क्या कांग्रेस ने एक मौका गंवा दिया?
हर चुनाव अलग होता है- केसी वेणुगोपाल
इस सवाल पर केसी वेणुगोपाल ने कहा कि 'हर चुनाव अलग होता है और उसकी परिस्थितियां भी अलग होती हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव में पूरे देश का माहौल अलग था. उस समय सब लोग कांग्रेस पार्टी को पूरी तरह खत्म मान चुके थे. हमारे पास संसाधन भी नहीं थे. जो भी संसाधन थे, उन्हें भी उस समय आयकर विभाग ने जब्त कर लिया था. उधर नरेंद्र मोदी 400 से ज्यादा सीटों की बात कर रहे थे. उस माहौल में भी कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया.
आज की स्थिति यह है कि कांग्रेस सिर्फ भाजपा से नहीं लड़ रही है. कांग्रेस का मुकाबला सिर्फ बीजेपी से नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम से है. इसमें आयकर विभाग, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय जैसी संस्थाएं भी शामिल हैं. यहां तक कि अब चुनाव आयोग भी शामिल है.