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क्या है गौतम अडानी का मैनेजमेंट स्टाइल? बेटे करण अडानी ने बताया

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी अडानी फैमिली के बारे में भी बात की. उन्होंने कहा कि ऑफिस के अलावा मेरे पिता की जिंदगी मेरी बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है. उन्होंने कहा कि उनके पिता सेक्रेटरी नहीं रखते हैं और अपना काम स्वयं करते हैं.

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करण अडानी ने बताया कि उनके पिता की जिंदगी उनकी बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है. (Photo:ITG/Hardik Chhabra)
करण अडानी ने बताया कि उनके पिता की जिंदगी उनकी बेटियों के इर्द-गिर्द घूमती है. (Photo:ITG/Hardik Chhabra)

अडानी पोर्ट्स एंड एसईजेड (Special economic zone) लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर करण अडानी ने अपने पिता और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी के मैनेजमेंट स्टाइल पर बात की है. उन्होंने कहा है कि उनके पिता काफी व्यावहारिक हैं और 24 घंटे उपलब्ध रहते हैं. उनके पास कंपनी का कोई भी आदमी पहुंच सकता है. करण अडानी ने अपने पिता के वर्किंग स्टाइल की चर्चा करते हुए कहा कि वे सेक्रेटरी नहीं रखते हैं और सारा काम स्वयं करते हैं हमें समझ में नहीं आता है कि वो कैसे मैनेज करते हैं.

करण अडानी नई दिल्ली में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव 2026 में शिरकत कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने अडानी ग्रुप पर खुलकर बात की. 

उन्होंने कहा कि उनके पिता गौतम अडानी सेक्रेटरी नहीं रखते हैं और वे उम्मीद करते हैं कि हमलोग भी अपना काम इसी तरह करें. उन्होंने कहा कि हमें लगभग रोजाना उनसे कुछ न कुछ सीखने को मिलता है. 

कार्यक्रम के दौरान जब उनसे पूछा गया है कि उनके पिता उन्हें कितनी बार कॉल करते हैं और वे एक दिन में उनसे कितनी बार मिलते हैं. तो करण करण अडानी ने कहा कि हर दो घंटे पर कॉल होती है या फिर कुछ न कुछ होता रहता है. कई बार रात के एक बजे घंटी बजेगी और और वे पूछते है, क्या तुम सो रहे हो? ये उनके काम करने का स्टाइल है और इसमें उन्हें आनंद आता है. उन्हें हर गतिविधि की जानकारी होती है. 

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करण अडानी से जब पूछा गया कि क्या वे सेक्रेटरी रखते हैं तो उन्होंने हंसते हुए जवाब दिया कि हां ये सच है. 

प्रोग्राम के दौरान करण अडानी की तीन छोटी बेटियों की चर्चा हुई. कहा जाता है कि करण अडानी की ये तीन बेटियां कभी भी गौतम अडानी के चैंबर में चली जाती हैं. 

करण अडानी ने इनके बारे में कहा, "हां ये तीन मेरी बेटियां हैं- अनुराधा, गायत्री और कावेरी. मैं कहूंगा कि इन तीनों को उन्होंने बिगाड़कर रख दिया है, हमारे ऑफिस में एक जोक भी चलता है कि अगर मीटिंग में कुछ भी टेंशन वाली बात होनी है तो उनके पोतियों को बुला लो ताकि वो शांत हो जाएं. वो बच्चियों के साथ समय गुजारना पसंद करते हैं. और उनकी जिंदगी उन्हीं के आस-पास कटती है."

करण अडानी ने कार्यक्रम के दौरान अपनी मां की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि उनका रोल परिवार की धुरी की तरह है. वही एकमात्र शख्सियत थीं जो हमेशा हमलोगों के साथ रहीं. करुणा और पारिवारिक मूल्य हमने उन्हीं से सीखा. इसके अलावा सामाजिक दायित्व को लेकर वे काफी काम कर रही हैं. 

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