भारत और अमेरिका के बीच लटकी ट्रेड डील पर जल्द कोई नया अपडेट आ सकता है. मंगलवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत की. इसमें व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा हुई.
जयशंकर और रुबियो के बीच फोन पर हुई बातचीत नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के एक दिन बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि व्यापार के मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा होगी. विदेश मंत्री ने कहा कि उनकी रूबियो के साथ 'अच्छी बातचीत' हुई है.
उन्होंने X पर लिखा, 'अभी-अभी @SecRubio के साथ एक अच्छी बातचीत पूरी हुई. हमने व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों, परमाणु सहयोग, रक्षा और ऊर्जा पर चर्चा की.' उन्होंने आगे कहा, 'इन और अन्य मुद्दों पर संपर्क में रहने पर सहमति बनी है.'
दूसरी तरफ अमेरिकी प्रेसी रिलीज में कहा गया है, 'रूबियो और जयशंकर ने चल रही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने में अपनी साझा रुचि पर चर्चा की.'
ट्रंप दे चुके हैं टैरिफ बढ़ाने की धमकी
बता दें कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का भारी शुल्क लगाने का ऐलान किया था. इसके बाद भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आई थी.
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए पिछले वर्ष कई दौर की वार्ताएं कीं. हालांकि, भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों को खोलने की वॉशिंगटन की मांगों के कारण यह समझौता अभी तक अटका है.
US राजदूत बोले- भारत जितना जरूरी कोई देश नहीं
अभी सोमवार को अमेरिकी दूतावास में अपने संबोधन में गोर ने कहा था कि भारत और अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते पर सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं. गोर ने यह भी कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए भारत जितना जरूरी कोई देश नहीं है.
जयशंकर और रुबियो के बीच फोन पर हुई बातचीत उसी दिन हुई जब ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा.
भारतीय सरकार के सूत्रों ने कहा है कि नए टैरिफ का भारत पर "न्यूनतम प्रभाव" पड़ने की उम्मीद है क्योंकि भारत और ईरान के बीच व्यापार की मात्रा वर्तमान में 2 अरब अमेरिकी डॉलर से कम है. सूत्रों के मुताबिक, भारत के लिए ईरान शीर्ष 50 वैश्विक व्यापारिक साझेदारों में भी शामिल नहीं है. उन्होंने बताया कि पिछले साल ईरान के साथ भारत का व्यापार 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो भारत के कुल व्यापार का लगभग 0.15 प्रतिशत है.