अमेरिका और भारत के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील पर नया अपडेट सामने आया है. भारत का एक डेलिगेशन इस मुद्दे पर बातचीत के लिए अगले सप्ताह अमेरिका का दौरा करेगा. यह बातचीत अमेरिका के नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर स्पष्टता लाने के लिए होगी. सूत्रों की मानें तो भारतीय वार्ताकारों की टीम 20 से 22 अप्रैल के बीच अमेरिका का दौरा करेगी, जहां दोनों देशों का जोर ट्रेड डील और टैरिफ से जुड़े अनसुलझे मुद्दों को सुलझाकर समझौते को अंतिम रूप देने पर रहेगा.
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर यह ताजा अपडेट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच 14 अप्रैल को द्विपक्षीय संबंधों और आर्थिक सहयोग के मुद्दे पर हुई 40 मिनट की टेलिफोन बातचीत के बाद आया है. अमेरिका-ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम और इस्लामाबाद में वार्ता विफल होने के बाद दोनों नेताओं की पहली बातचीत थी. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने बातचीत को सकारात्मक बताते हुए कहा कि दोनों नेताओं ने प्रस्तावित टेड डील सहित कई अहम क्षेत्रों पर चर्चा की.
उन्होंने संकेत दिया कि भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा समेत कई बड़े समझौते आने वाले दिनों में सामने आ सकते हैं. पीएम मोदी ने भी X पर एक पोस्ट करके राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई बातचीत की जानकारी दी. उन्होंने लिखा, 'मेरे मित्र, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया. हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने द्विपक्षीय सहयोग में हुई महत्वपूर्ण प्रगति की समीक्षा की. हम सभी क्षेत्रों में अपनी व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. मने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के महत्व पर भी जोर दिया.'
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भारत-अमेरिका ट्रेड डील का स्टेटस
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम ट्रेड डील का फ्रेमवर्क पहले ही तय हो चुका है और अब बातचीत निर्णायक चरण में है. यह डील मार्च में साइन होनी थी, लेकिन अमेरिका में टैरिफ से जुड़े बदलावों के चलते इसमें देरी हुई. अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'रेसिप्रोकल टैरिफ' को अवैध बताकर रद्द कर दिया था. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने 24 फरवरी से 150 दिनों के लिए सभी देशों पर 10% टैरिफ लागू किया. ट्रंप ने कहा था कि उन देशों के लिए टैरिफ में कोई बदलाव नहीं होगा, जिनके साथ ट्रेड डील पर सहमति बन चुकी है.
हालांकि, यूरोपीय यूनियन और अन्य कई देशों ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए ट्रंप प्रशासन से टैरिफ पर स्पष्टता की मांग की. भारत भी नए टैरिफ स्ट्रक्चर पर स्पष्टता चाहता है. इसीलिए दोनों देशों मुख्य वार्ताकारों की बैठक, जो फरवरी में ट्रेड डील को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्तावित थी, इन बदलावों के कारण टाल दी गई थी. इस बीच, संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) ने 60 देशों के साथ अमेरिका के द्वीपक्षीय व्यापार की समीक्षा के लिए सेक्शन 301 के तहत जांच भी शुरू की है. इसके अलावा यूएसटीआर ने 16 अर्थव्यवस्थाओं की औद्योगिक नीतियों की अलग से जांच शुरू की है, जिनमें भारत और चीन शामिल हैं. इससे व्यापार वार्ता और जटिल हो गई है.