भारत का करीब 3 लाख मीट्रिक टन लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) इस वक्त स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में फंसा हुआ है. मिनिस्ट्री ऑफ शिपिंग के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने मंगलवार को प्रेस ब्रीफिंग में यह जानकारी दी. शिपिंग मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में इस क्षेत्र में 22 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं. इनमें 6 LPG कैरियर, 1 LNG टैंकर, 4 क्रूड ऑयल टैंकर, 1 केमिकल प्रोडक्ट्स कैरियर, 3 कंटेनर जहाज और 2 बल्क कैरियर सहित अन्य जहाजें शामिल हैं.
राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि एक बड़े जहाज (Very Large Gas Carrier) में लगभग 45,000 मीट्रिक टन LPG ले जाई जा सकती है. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि होर्मुज में इस समय भारत की 6 जहाजें 3 लाख मीट्रिक टन LPG लेकर फंसी हुई हैं. इस बीच, दो भारतीय ध्वज वाले LPG टैंकर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' 14 मार्च को सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पार कर भारत पहुंच चुके हैं. ये जहाज लगभग 92,700 मीट्रिक टन LPG लेकर आए हैं.
वहीं, 'जग लाड़की' नाम का एक क्रूड ऑयल टैंकर भी संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह से 81,000 मीट्रिक टन क्रूड ऑयल लेकर सुरक्षित रूप से भारत की ओर रवाना हो चुका है. इस बीच भारत ने मंगलवार को उन खबरों को खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि नई दिल्ली ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से अपनी जहाजों को सुरक्षित निकालने के बदले ईरान के साथ जहाजों की अदला-बदली पर चर्चा की है. भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है.
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जहाजों को होर्मुज पार कराने के लिए बातचीत जारी
इससे पहले न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि ईरान ने तीन जब्त टैंकरों की वापसी के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय झंडे वाले या भारत की ओर आने वाले जहाजों को सुरक्षित मार्ग देने की पेशकश की थी. हालांकि, भारत ने यह जरूर स्वीकार किया कि वह ईरान और अन्य देशों के साथ लगातार संपर्क में है, ताकि होर्मुज क्षेत्र में फंसे अन्य जहाजों को सुरक्षित वापस लाया जा सके. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि कई जहाज अब भी उस क्षेत्र में मौजूद हैं और सरकार की प्राथमिकता उन्हें सुरक्षित तरीके से वापस लाना है. इसके लिए ईरान और अन्य संबंधित देशों के साथ बातचीत जारी है. उन्होंने बताया कि ईरान को मानवीय सहायता उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दों पर भी वहां के अधिकारियों के साथ चर्चा हो रही है.
इस बीच, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर की हालिया ब्रसेल्स यात्रा का भी उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि एस. जयशंकर को यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की परिषद की बैठक में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था, जहां उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ संबंधों के अलावा वैश्विक चुनौतियों पर चर्चा की. इस बैठक में ईरान युद्ध के बीच विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति और उसके ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई. यूरोपीय देशों के विदेश मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है. भारत ने भी इसी रुख को दोहराते हुए क्षेत्र में शांति और स्थिरता पर जोर दिया.
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बता दें कि भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने 4 फरवरी, 2026 को मुंबई तट के पास अरब सागर में एमटी एस्फाल्ट स्टार (IMO 9463528), एमटी अल जाफजिया (IMO 9171498) और एमटी स्टेलर रूबी (IMO 9555199) नाम के तीन तेल टैंकरों को जब्त किया था. आरोप है कि इन तेल टैंकरों ने भारतीय समुद्री क्षेत्र के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन (EEZ) में बिना किसी इंडियन अथॉरिटी को सूचित किए जाली दस्तावेजों के आधार पर अवैध रूप से दूसरी जहाजों में करीब 30 मीट्रिक टन हेवी फ्यूल ऑयल (HFO) का ट्रांसफर किया था. हालांकि, भारतीय तटरक्षक बल ने यह नहीं बताया है कि ये तीनों टैंकर किस देश के हैं. इन जहाजों की तलाशी, इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच और चालक दल के सदस्यों से पूछताछ में पता चला कि ये संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों से सस्ता तेल लाते थे और अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में एक जहाज से दूसरी जहाज में ट्रांसफर करते थे.