भारत में हर साल सड़क हादसे में लाखों लोगों की जान जाती है, लेकिन समय पर इलाज मिल जाए तो हजारों की जान बचाई जा सकती है. इसी के तहत ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने उत्तरदाता प्रशिक्षण कार्यक्रम 'रक्षक' की शुरुआत की. इस पहले के जरिए 30,000 उत्तरदाताओं को प्रशिक्षित किया जाएगा.
कार्यक्रम का आयोजन वाणिज्य और परिवहन विभाग की ओर से डॉयचे गेसेलशाफ्टफुर इंटरनेशनल जुसामेनरबीट (जीआईजेड) और इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ किया गया. इस दौरान सीएम ने कहा "हादसे के बाद का पहला घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है. इस दौरान घायल क इलाज मिल जाए तो हम कई जानें बचा सकते हैं.
कार्यक्रम में सीएम ने कहा "हादसे में घायल व्यक्ति का जीवन बचाने से ज्यादा महत्वपूर्ण और पवित्र कुछ भी नहीं है." सड़क हादसे में मौत सिर्फ एक मृत्यु या एक परिवार की क्षति नहीं, बल्कि पूरे समाज का नुकसान है. यह हमारी अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर डालते हैं.
रक्षक कार्यक्रम के तहत राज्य सरकार छोटी-छोटी मरम्मत की दुकानों पर काम करने वाले, पेट्रोल पंप, और पुलिस कर्मियों सहित सड़क किनारे रहने वाले समुदायों के स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित करेगी. ये लोग नेशनल और स्टेट हाईवे पर तैनात रहेंगे, जो हादसे के तुरंत बाद वाले समय (गोल्डन आवर) में घायलों को प्राथमिक उपचार (first aid) उपलब्ध कराने के साथ ही अस्पताल ले जाने से पहले जरूरी इलाज करेंगे.
300 मास्टर प्रशिक्षकों को दी जाएगी ट्रेनिंग
प्रथम उत्तरदाताओं के लिए दो चरणों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. पहले चरण में मोटर वाहन कौशल विकास परिषद (एएसडीसी) के विशेषज्ञों द्वारा 10 जगहों पर ट्रेनिंग दी जाएगी. भुवनेश्वर, कटक, बरहामपुर, संबलपुर, बालासोर, कोरापुट, फूलबनी, सुंदरगढ़, क्योंझर और भवानीपटना में दी जाने वाली ट्रेनिंग में 300 मास्टर प्रशिक्षकों को तैयार किया जाएगा.
सुरक्षा उपायों का पढ़ाएंगे लोगों को पाठ
दूसरे चरण में, 300 मास्टर ट्रेनर सभी जिलों में दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में जाएंगे. सड़क हादसे में घायलों की मदद करने के लिए स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित करेंगे. पहले उत्तरदाता सड़क सुरक्षा उपायों और कानून के बारे में भी लोगों को शिक्षित और सूचित भी करेंगे.
घायलों को बचाने पर दो हजार का इनाम
ओडिशा की नवीन पटनायक सरकार ने सड़क दुर्घटना में घायलों को बचाने वाले लोगों को 2,000 रुपये इनाम देने का प्रावधान किया है. पटनायक ने कहा कि सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवारों की सहायता के लिए सरकार ने 147 करोड़ रुपये का एक कोष रखा है.