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किसानों का आंदोलन और तेज होगा, पंजाब में रेल रोको के बाद देशव्यापी हाई-वे बंदी का ऐलान

बैठक के बाद समन्वय समिति की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि 5 नवंबर को पूरे देश में हाई-वे जाम करने का फैसला लिया गया है. किसान संगठनों की बैठक में ये फैसला भी लिया गया है कि 26-27 नवंबर को दिल्ली चलो आंदोलन किया जाएगा.

पंजाब में किसानों ने चलाया रेल रोको आंदोलन (फाइल फोटो-PTI) पंजाब में किसानों ने चलाया रेल रोको आंदोलन (फाइल फोटो-PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • बड़ा होगा किसानों का कृषि कानून विरोधी आंदोलन
  • 5 नवंबर को पूरे देश में जाम किए जाएंगे हाई-वे
  • बीजेपी नेताओं के दफ्तरों पर ही होगा प्रदर्शन

नए कृषि कानूनों पर किसानों का विरोध लगातार जारी है. खासकर पंजाब के किसान मुखर होकर केंद्र सरकार द्वारा लाए गए इन तीनों कानूनों के आवाज उठा रहे हैं. रेल रोको आंदोलन के बाद अब किसान नेशनल हाई-वे बंदी की तरफ बढ़ने जा रहे हैं. 

किसान संगठनों ने ऐलान किया है कि पांच नवंबर को देशव्यापी हाई-वे जाम किया जाएगा. अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (AIKSCC) समेत 500 से ज्यादा संगठनों से जुड़े प्रतिनिधि मंगलवार को दिल्ली में आयोजित बैठक में शामिल हुए. बैठक के बाद समन्वय समिति की तरफ से जारी बयान में बताया गया कि 5 नवंबर को पूरे देश में हाई-वे जाम करने का फैसला लिया गया है. 

'दिल्ली चलो' आंदोलन भी

किसान संगठनों की बैठक में ये फैसला भी लिया गया है कि 26-27 नवंबर को 'दिल्ली चलो' आंदोलन किया जाएगा. समन्वय समिति के बयान में कहा गया है, ''हमारी मुख्य मांग हाल में लाए गए तीनों कृषि कानून वापस लेने की मांग की जाएगी. साथ ही इलेक्ट्रिसिटी बिल 2020 की वापसी की मांग भी की जाएगी. बड़ी तादाद में किसान जमा होकर ये मांगे सरकार के सामने रखेंगे.''

इस देशव्यापी आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए एक कमेटी भी बनाई गई है, जिसमें वीएम सिंह, बलबीर सिंह, गुरनाम सिंह, राजू शेट्टी और योगेंद्र यादव जैसे चेहरे शामिल होंगे. ये कमेटी 5 नवंबर के हाई-वे रोको और 26-27 नवंबर के दिल्ली चलो आंदोलन को देखेगी. 

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बीजेपी नेताओं के दफ्तर पर भी प्रदर्शन
किसान संगठनों की मीटिंग में ये फैसला भी लिया गया है कि पूरे देश में किसान केंद्र सरकार समेत अन्य सरकारी दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन करेंगे. साथ ही बीजेपी नेताओं के दफ्तरों और उनके सहयोगी कॉर्पोरेट घरानों के दफ्तरों पर भी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. 

मालगाड़ी रोकने की आलोचना
भविष्य की रूपरेखा के अलावा किसानों की बैठक में पंजाब में मालगाड़ी रोकने का विरोध किया. किसानों ने कहा कि यह पंजाब की जनता और किसान को ब्लैकमेल करने वाला फैसला है. बता दें कि कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध करते हुए पंजाब में किसान रेलवे ट्रैक पर बैठ गए थे, लंबे समय तक रेल रोको आंदोलन चलाया गया. इसके पंजाब में माल की किल्लत होने लगी. पंजाब सरकार ने प्रदर्शनकारी किसानों से रेलवे ट्रैक खाली करने का अनुरोध किया तो किसान मालगाड़ी के लिए टैक खाली करने पर राजी हो गए. इसके बावजूद केंद्र सरकार ने पंजाब में मालगाड़ी भेजने पर पाबंदी लगा दी. 

पंजाब की कैप्टन अमरिंदर सरकार ने रेल मंत्री से इस मसले में दखल देने की बात की तो पीयूष गोयल ने पंजाब सरकार से मालगाड़ी और उसके क्रू की सुरक्षा का आश्वासन मांग लिया. 
 

 

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