scorecardresearch
 

पश्चिम बंगाल में SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल शुरू, चुनाव आयोग ने दिए ये निर्देश

पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कई अहम निर्देश चुनाव आयोग को दिए थे. चुनाव आयोग ने अब उन आदेशों पर अमल शुरू कर दिया है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को आदेश दिया है कि कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक सभी सुधार करें.

Advertisement
X
चुनाव आयोग ने डीजीपी को भी दिए निर्देश
चुनाव आयोग ने डीजीपी को भी दिए निर्देश

निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल में SIR की प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश-निर्देश पर अमल शुरू कर दिया है. आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सभी सुधार करने के आदेश दिए हैं. आयोग ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), कोलकाता के पुलिस कमिश्नर और सभी जिलों के जिलाधिकारी- पुलिस अधीक्षकों को एसआईआर के दौरान सख्त कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के नागरिकों को आश्वस्त किया है कि किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी और ऐसे सभी मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट ने 19 जनवरी को इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को कई निर्देश दिए थे. चुनाव आयोग के ताजा कदम सर्वोच्च न्यायालय के उन्हीं आदेशों के अनुपालन से संबंधित हैं.

आयोग ने पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के लिए जो निर्देश दिए हैं, उनके मुताबिक 24 जनवरी तक तार्किक श्रेणी के तहत आने वाले लोगों की नाम से संबंधित विसंगतियों को प्रदर्शित किया जाएगा. ग्राम पंचायत भवनों के साथ हर तहसील और ब्लॉक दफ्तर में सार्वजनिक स्थानों पर, सभी शहरों के वार्ड कार्यालयों में इन्हें प्रदर्शित किया जाएगा. इन दो श्रेणियों में शामिल व्यक्ति यानी तार्किक विसंगति का ब्यौरा क्या है, वह भी प्रकाशित किया जाएगा.

Advertisement

मतदाता का अधिकृत प्रतिनिधि बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) भी हो सकता है. मतदाता को ऐसे प्रतिनिधि के पक्ष में अपने हस्ताक्षर या अंगूठे की छाप युक्त एक प्राधिकार पत्र देना होगा. मुख्य कार्यकारी अधिकारी ग्राम पंचायत भवन या ब्लॉक कार्यालय या वार्ड कार्यालय को नामित करेगा. वोटर लिस्ट के प्रत्येक भाग के लिए, मतदान केंद्र के भीतर या उसके पास क्षेत्र, दस्तावेज जमा करने और सुनवाई के लिए तय होंगे. प्रभावित अपीलकर्ता व्यक्ति या उनके नामजद व्यक्ति व्यक्तियों के नाम प्रदर्शित किए जाने के बाद दस दिन तक पंचायत भवन या ब्लॉक या वार्ड कार्यालय में दस्तावेज/आपत्तियां या दावे कर सकते हैं.

यह भी पढ़ें: बंगाल SIR केस: सुप्रीम कोर्ट ने ECI से पूछा- मतदाता के साथ BLA को क्यों नहीं आने दे रहे?

आयोग के मुताबिक जिन लोगों ने अभी तक अपने दावे, दस्तावेज या आपत्तियां जमा नहीं की हैं, वे विस्तारित अवधि के भीतर ऐसा कर सकते हैं. उन्हें इसकी विशेष अनुमति दी गई है. सभी प्रभावित व्यक्तियों को प्रस्तुत करने का अवसर दिए जाने के अलावा दस्तावेजों, सामग्री, या आपत्तियों को भी ERO/AERO एक ही समय या तो व्यक्तिगत रूप से या अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से सुनेंगे. इसके बाद ही वो सभी तथ्यों पर गौर कर उचित निर्णय लेंगे. वह अधिकारी, जो दस्तावेज प्राप्त करेगा या प्रभावित लोगों को सुनेगा, व्यक्तियों, दस्तावेजों की प्राप्ति और इस तरह के आचरण को भी प्रमाणित करेंगे.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में बढ़ सकती है SIR डेडलाइन, चुनाव आयोग ने दिया हिंट

चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि प्राधिकरण पत्र, यदि कोई हो और दस्तावेजों की प्राप्ति और आचरण का प्रमाण पत्र बीएलओ ऐप में अपलोड की जाएगी. सुनवाई के दौरान दावेदार मतदाता माध्यमिक परीक्षा प्रवेश पत्र यानी कक्षा 10 की परीक्षा का एडमिट कार्ड (जिसमें जन्म तिथि छपी हो) वो भी माध्यमिक पास प्रमाण पत्र के अलावा प्रस्तुत कर सकता है..सभी संबंधित अधिकारियों को इन प्रावधानों के सख्ती से पालन का निर्देश दिया गया है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement