scorecardresearch
 

DRDO बना रहा नया लाइट वेट टैंक, चीन से लद्दाख में तनाव के दौरान हुई थी कमी महसूस

बस एक साल और. इसके बाद लद्दाख में चीन सीमा के पास स्वदेशी हल्के वजन की टैंक तैनात हो जाएगी. सिर्फ वजन हल्का होगा, मारक क्षमता नहीं. चीन ने कोई हिमाकत की तो भारतीय टैंक के गोले मौत बनकर आसमान से बरसेंगे.

X
K-9 वज्र टी टैंक पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह. इसी टैंक के प्लेटफॉर्म पर बन सकता है नया लाइट वेट टैंक. (फोटोः PTI) K-9 वज्र टी टैंक पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह. इसी टैंक के प्लेटफॉर्म पर बन सकता है नया लाइट वेट टैंक. (फोटोः PTI)
स्टोरी हाइलाइट्स
  • फायदा- ऊचांई पर किया जाएगा तैनात
  • गोले मारकर कर देगा दुश्मन को छलनी
  • K-9 वज्र टी टैंक के प्लेटफॉर्म पर बनेगा!

साल 2023 तक भारतीय सेना (Indian Army) को लाइट वेट टैंक्स यानी हल्के वजन के तोप (Light Weight Tank) मिल जाएंगे. ये टैंक्स भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और लार्सेन एंड टुब्रो (L&T) मिलकर बना रहे हैं. पहला लाइट वेट टैंक मेक-1 सीरीज का होगा. अभी तक यह पुष्ट नहीं है न ही इसके मॉडल को लेकर खुलासा किया गया है. लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि इसे के9-वज्र टी (K-9 Vajra-T) के प्लेटफॉर्म पर बनाया जाएगा. 

के9-वज्र टी (K-9 Vajra-T) 155 मिलीमीटर की सेल्फ प्रोपेल्ड आर्टिलरी. ऐसे 100 तोप भारतीय सेना में तैनात हैं. इसके अलावा 200 तोप और आ सकते हैं. असल में इसे दक्षिण कोरिया बनाता है. लेकिन भारत में इसे देश की परिस्थितियों के हिसाब से बदल दिया गया. यह काम स्वदेशी कंपनी ही कर रही है. इसके गोले की रेंज 18 से 54 KM तक है. मतलब इतनी दूर बैठा दुश्मन बच नहीं सकता. इसका उपयोग अभी चीन के साथ हुए संघर्ष के दौरान भी किया गया था. इसमें 48 राउंड गोले स्टोर होते हैं. ऑपरेशनल रेंज 360 KM और अधिकतम गति 67 KM प्रतिघंटा है. 

इस टैंक के गोले 18 से 54 किलोमीटर तक जाते हैं. मारक क्षमता और कम वजन यही है इसकी ताकत.
इस टैंक के गोले 18 से 54 किलोमीटर तक जाते हैं. मारक क्षमता और कम वजन यही है इसकी ताकत.

हाल ही में एक कार्यक्रम में डीआरडीओ चीफ डॉ. जी सतीश रेड्डी ने कहा था कि लाइट वेट टैंक का काम तेजी से चल रहा है. साल 2023 तक टैंक पूरी तरह से तैयार हो जाएगा. हालांकि, अभी तक भारतीय सेना की तरफ से लाइट वेट टैंक्स को लेकर किसी तरह का तय ऑर्डर नहीं आया है. लेकिन इस साल की शुरुआत में रक्षा मंत्रालय ने ऐसी लिस्ट निकाली थी, जिसमें कहा गया था कि आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत हथियारों का निर्माण देश की कंपनी को करना चाहिए. इस लिस्ट में करीब 101 आइटम्स थे. दूसरी लिस्ट में 108 आइटम्स थे. 

लाइट वेट टैंक (Light Weight Tank) के साथ माउंटेड आर्टिलरी गन सिस्टम बनाना चाहिए. जो 155 मिमी/52 कैलिबर, इसके अलावा 7.62 मिमीx54 स्नाइपर एम्यूनिशन, पारदर्शी आर्मर, अर्जुन टैंक के लिए बख्तरबंद रिकवरी वाहन इस साल की तीसरी लिस्ट में शामिल हो सकते हैं. आखिर लाइट वेट टैंक (Light Weight Tank) की जरूरत क्यों पड़ी? 

चीन के साथ सीमा विवाद के दौरान पूर्वी लद्दाख के पास LAC पर हल्के तोपों की जरूरत महसूस हुई थी. लेकिन भारतीय सेना के पास ऐसी तोपें नहीं थीं. के9-वज्र टी (K-9 Vajra-T) टैंक भारतीय सेना की सबसे हल्की तोप है. इसका वजन 35 टन है. जबकि, टी-72 का 45 और टी-90 का 46 टन है. इतने भारी तोपों को इतनी ऊंचाई पर ले जाना मुश्किल होता है. इसलिए हल्के तोपों की जरूरत महसूस हो रही थी. पिछले साल अप्रैल में भारतीय सेना ने 350 हल्के तोपों, जिनका वजन 25 टन से कम हो, उसके लिए रिक्वेस्ट ऑफ इन्फॉर्मेशन मांगा था. इन तोपों को अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया जाएगा. 

आजतक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें