संसद के बजट सत्र से पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने केंद्र सरकार की विधायी कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोला. विपक्षी नेताओं ने सरकार पर बिना सूचना के आखिरी वक्त में बिल पेश करने की 'सस्पेंस एंड स्टन' रणनीति अपनाने का आरोप लगाया. सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और विदेशी नीति, मुक्त व्यापार समझौतों, मनरेगा फंडिंग समेत कई मुद्दों पर चर्चा की मांग की. साथ ही क्षेत्रीय दलों ने भी किसानों की समस्याओं, छापेमारी और जातिगत तनाव जैसे मुद्दे उठाए.
सूत्रों ने बताया कि सर्वदलीय बैठक में सीपीआई (एम) सांसद जॉन ब्रिटास ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए. उन्होंने सरकार पर बिना किसी सूचना के आखिरी वक्त पर बिल पेश करने के लिए सस्पेंस और स्टन की रणनीति अपनाती है.
उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विपक्षी सदस्यों को खाली दस्तावेज बांटे गए हैं, जो सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं, क्योंकि सरकार सत्र का एजेंडा स्पष्ट नहीं कर रही है.
'विदेश नीति पर होनी चाहिए बात'
CPI(M) नेता ने कहा कि विदेशी नीति के मोर्चे पर भारत को जिस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उस पर संसद में बात होनी चाहिए.
उन्होंने वेनेजुएला, फिलिस्तीन और ग्रीनलैंड की मौजूदा स्थितियों का जिक्र करते हुए सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने को कहा. विपक्ष ने ये भी आरोप लगाया कि सरकार की 'सस्पेंस' वाली राजनीति और महत्वपूर्ण कार्यों को अंतिम समय तक गुप्त रखने की आदत अब बंद होनी चाहिए.
उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की मांग की है और मनरेगा के लिए राज्य सरकारों की फंडिंग बढ़ाने के केंद्र के फैसले से उत्पन्न मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया जाएगा.
क्षेत्रीय दलों ने भी उठाए सवाल
सूत्रों ने बताया कि क्षेत्रीय दलों ने भी बैठक में अपने मुद्दे प्रमुखता से रखे हैं. बीजू जनता दल (BJD) ने ओडिशा के किसानों की समस्याओं और फसल बीमा में देरी के मुद्दे पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आई-पैक (IPAC) पर हुई छापेमारी का मुद्दा उठाते हुए केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. साथ ही जॉन ब्रिटास ने यूजीसी (UGC) और जातिगत तनाव को बीजेपी की आंतरिक समस्या बताया. हालांकि, विपक्ष ने इसे भी संसद में उठाने का मन बनाया है.