भारतीय राजनीति, समाज की जो कुछ एक अहम कड़ियां हैं या यूं कहें की कठिन सच्चाई है, उनमें कास्ट यानी जाति सबसे अगली कतार में शामिल है. अनगिनत राजनीतिक दल हैं जो या तो जातिगत राजनीति करते हैं. जो जाति से ऊपर उठकर राजनीति करने का दावा करते हैं, उनके भी पर्दे के पीछे जाति प्रकोष्ठ होते ही हैं.लिहाज़ा, आज भारतीय राजनीति के लिए अहम दिन था. बिहार की नीतीश सरकार ने आज जातिगत सर्वे के आंकड़े जारी किए. इन आंकड़ों को देखने के कई सिरे हैं. जैसे अगर आप धर्म का सिरा पकड़ें तो बिहार में हिंदू धर्म को मानने वाले तकरीबन 82 प्रतिशत हैं. मुसलमान साढ़े 17 फ़ीसदी से थोड़े अधिक. बाकी आधे प्रतिशत में ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन हैं. लेकिन जो इस सर्वे का निचोड़ है. जिसका तरह-तरह से विश्लेषण हो रहा है. वह है जाति का सिरा. जातिगत गणना की मानें तो राज्य में पिछड़ा वर्ग की आबादी 27.12 फ़ीसदी है. जबकि अति पिछड़ा वर्ग की आबादी 36 फ़ीसद से अधिक है. वहीं सामान्य वर्ग की आबादी 15 फ़ीसद से कुछ ज़्यादा है. अनुसूचित जाति की आबादी 19 फ़ीसद से ज़्यादा है.राष्ट्रीय जनता दल के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने आज के दिन को ऐतिहासिक बताते हुए समाजिक न्याय की राजनीति को मजबूती मिलने की बात कही.वहीं भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने इस रिपोर्ट को अधूरा बताया.इनके-उनके बयानों से इतर इस सर्वे के टेक अवेज क्या रहे? सुनिए ‘दिन भर’ में.
आज जिस वक्त प्रधानमंत्री राजस्थान के चित्तौड़गढ़ में रैली को संबोधित कर रहे थे, उसी वक्त राजधानी दिल्ली में एक प्रेसकॉन्फ्रेंस हुई. ये प्रेस कॉन्फ्रेंस बीजेपी की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद हुई है जिसमें ये बताया गया कि राजस्थान- छत्तीसगढ़ के लिए बीजेपी ने कैंडिडेट्स तय कर लिए हैं. हालांकि आज केवल छत्तीसगढ़ के 50 उम्मीदवारों के नाम आए,राजस्थान के लिए नहीं लेकिन इतना तय हो चला है कि आने वाले 2-3 दिनों में बीजेपी किन उम्मीदवारों के साथ जा रही हैं इन राज्यों में ये साफ हो जाएगा. मध्यप्रदेश में जिस तरह भाजपा ने केन्द्रीय मंत्री और सांसदों को विधानसभा चुनाव के लिए उतारा है, उसके बाद यही अनुमान राजस्थान-छत्तीसगढ़ के लिए भी लगाया जा रहा था. 2023 के आखिर में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं. तो इन चुनावों के लिए बीजेपी की इस दो दिन की बैठक में क्या तय हुआ और इस बैठक से छत्तीसगढ़- राजस्थान में उम्मीदवारों को लेकर क्या मंथन हुआ? सुनिए ‘दिन भर’ में.
साउथ ईस्ट दिल्ली से कल एक गिरफ़्तारी हुई जिसके बाद आज दिन भर उस गिरफ़्तारी के इर्द गिर्द चर्चा जारी है. ये गिरफ़्तारी है एनआईए की सूची में मोस्ट वांटेड आतंकवादी शाहनवाज उर्फ शफी उज्जामा की. एनआईए का कहना है कि शाहनवाज ISIS के पुणे मॉड्यूल से जुड़ा हुआ था. इस मॉड्यूल से जुड़े दो लोगों की गिरफ़्तारी पहले ही हो चुकी थी. तब उन दोनों को बाइक चोर समझ के पकड़ा गया. जांच में एनआईए ने पाया कि ये आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्त थे. इंडिया टुडे के अरविन्द ओझा की रिपोर्ट के अनुसार ये लोग जंगलों में बम बनाते थे और वहीं उसकी टेस्टिंग भी करते थे. फिर देश के अलग अलग हिस्सों में सप्लाई करने का प्लान बना रहे थे. एनआईए को महीनों से शाहनवाज की तलाश थी जो कल रात पूरी हुई. उसके ऊपर 3 लाख रुपए का इनाम था। शाहनवाज के पास से केमिकल पदार्थ और IED बनाने में इस्तेमाल होने वाला मटेरियल भी मिला है. इस गिरफ़्तारी से जुड़ी और ज्यादा जानकारी के लिए सुनिए ‘दिन भर’.
आज से 122 साल पहले 10 दिसंबर 1901 को पहला नोबल पुरस्कार दिया गया था. ये पुरस्कार फिजिक्स कैटेगरी में विल्हेम रॉन्टगन को एक्स-रे की खोज के लिए दिया गया. ये पुरस्कार सिर्फ फिजिक्स ही नहीं केमिस्ट्री,साइकॉलजी, मेडिसिन, साहित्य और शांति के क्षेत्र में दिया जाता है. आज ये सब बातें हम इसलिए बता रहे हैं कि क्योंकि आज से नोबल पुरस्कार 2023 का ऐलान होना शुरू हुआ है. और मेडिसिन के क्षेत्र में नोबल प्राइज का ऐलान भी हो गया. साइंटिस्ट कैटलिन कैरिको और ड्रू विजमैन इस साल के नोबल प्राइज इन मेडिसिन के विजेता हैं. ये वो साऐन्टिस्टस हैं जिन्होंने कोविड से लड़ने वाली mrna वैक्सीन डेवलप की थी. मिला है. हमने बात की आजतक रेडियो के लिए साइंस से जुड़ी खबरों पर नजर रखने वाले रिचीक मिश्रा से और उनसे कैटलीन कारिको और डू वीसमन क्यों इस बार के नोबल के हकदार थे- सुनिए ‘दिन भर’ में.