कर्नाटक स्टेट साइबर कमांड ने बेंगलुरु में चल रहे एक बड़े फर्जी कॉल सेंटर रैकेट का खुलासा किया है. पुलिस के अनुसार आरोपी अमेरिकी अकाउंटिंग सॉफ्टवेयर कंपनी ‘इंट्यूट क्विकबुक्स’ के नाम का इस्तेमाल कर अमेरिका के नागरिकों से ठगी कर रहे थे. इस मामले में दिल्ली निवासी प्रशांत और उत्तर प्रदेश निवासी आकाश को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी.
दरअसल, पुलिस को सूचना मिली थी कि बेंगलुरु के अलग-अलग इलाकों में फर्जी कॉल सेंटर संचालित किए जा रहे हैं. इसके बाद अधिकारियों ने चार स्थानों पर छापेमारी की. जांच में सामने आया कि आरोपी खुद को अमेरिकी कंपनी का प्रतिनिधि बताकर लोगों को नकली टैक्स सलाह, फर्जी लाइसेंस और रिन्यूअल सेवाएं उपलब्ध कराते थे.
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आरोपियों पर यह भी आरोप है कि वे नकली लाइसेंस की और फर्जी सॉफ्टवेयर सेवाएं देकर अमेरिकी नागरिकों से भारी रकम वसूलते थे. कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी अमेरिकी अधिकारियों जैसे नकली नामों का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे.
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद
कर्नाटक स्टेट साइबर कमांड के महानिदेशक प्रणब मोहंती ने बताया कि आरोपियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई हैं. पुलिस ने मौके से 44 सॉलिड स्टेट ड्राइव (SSD), दो मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, 9 CPU और पीड़ितों से बातचीत के लिए तैयार किए गए स्क्रिप्ट बरामद किए हैं.
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने ‘सर्कल स्क्वेयर LLC’ नाम से एक कंपनी बनाई थी. इसके जरिए वे शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर अमेरिका के नागरिकों से ठगी की रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करते थे.
मनी लॉन्ड्रिंग एंगल की जांच जारी
प्रणब मोहंती ने कहा कि जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि ठगी की रकम किन खातों में भेजी गई और उसे किस तरह मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए इधर-उधर किया गया. पुलिस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है.