दिल्ली शराब नीति मामले में संजय सिंह को जमानत मिलने के एक दिन बाद, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने ईडी के वकीलों की सूची शेयर करते हुए बीजेपी पर निशाना साधा था. उन्होंने पूछा था कि लोकसभा चुनाव 2024 के लिए नई दिल्ली सीट से भाजपा उम्मीदवार बांसुरी स्वराज का नाम संजय सिंह मामले में ईडी की ओर से पेश होने वाले वकीलों की लिस्ट में क्यों है? बता दें कि बांसुरी स्वराज भी पेशे से वकील हैं.
ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उल्लेख किया कि यह अनजाने में हुई एक गलती थी. उन्होंने कहा कि पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की बेटी और दिल्ली भाजपा उम्मीदवार बांसुरी स्वराज केंद्रीय एजेंसी के लिए अदालत में पेश नहीं हुईं. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संजय सिंह को जमानत दे दी क्योंकि ईडी ने उनकी जमानत याचिका का विरोध नहीं किया. शीर्ष अदालत ने कहा था कि संजय सिंह को ट्रायल कोर्ट द्वारा तय किए जाने वाले नियमों और शर्तों के आधार पर रिहा किया जाएगा और उनकी जमानत को अन्य अभियुक्तों के लिए मिसाल के तौर पर पेश नहीं किया जाएगा.
संजय सिंह जी के मामले में ED की तरफ़ से वकीलों में भाजपा की प्रत्याशी और इनकी प्रवक्ता बांसुरी स्वराज का नाम है ।
— Saurabh Bharadwaj (@Saurabh_MLAgk) April 3, 2024
मैंने कल ही कहा था भाजपा और ED एक ही बात है । pic.twitter.com/742dGrw6bK
नया विवाद तब खड़ा हो गया जब सौरभ भारद्वाज ने पूछा कि मामले में ईडी वकील के रूप में बांसुरी स्वराज का नाम क्यों लिया गया? भारद्वाज ने एक पेपर का स्क्रीनशॉट भी साझा किया जिसमें ईडी वकील के रूप में सूर्यप्रकाश वी राजू, मुकेह कुमार मारोरिया, जोहेब हुसैन, अन्नम वेंकटेश, कनु अग्रवाल और अरकज कुमार के साथ बांसुरी स्वराज का नाम शामिल था. सौरभ भारद्वाज ने कहा, 'मैंने देखा है कि बांसुरी स्वराज का नाम ईडी वकील के रूप में उल्लेखित है. बांसुरी स्वराज भाजपा प्रवक्ता हैं और लोकसभा चुनाव के लिए उम्मीदवार भी हैं. तो बीजेपी के लोग ईडी के लिए केस लड़ रहे हैं?'
राउज एवेन्यू कोर्ट ने बुधवार को संजय सिंह के लिए जमानत की शर्तें तय कर दीं. शर्तों के मुताबिक वह दिल्ली-एनसीआर छोड़कर नहीं जाएंगे. अगर जाते भी हैं, तो ईडी को सूचित करेंगे और अपना लोकेशन शेयर करेंगे. वह दिल्ली शराब घोटाला केस के बारे में मीडिया में या फिर सार्वजनिक तौर पर किसी तरह की टिप्पणी या चर्चा नहीं करेंगे. उन्हें अपना पासपोर्ट सरेंडर करना होगा. उन्हें जांच अधिकारी को अपना मोबाइल नंबर उपलब्ध कराना होगा. साथ ही कोर्ट ने उन्हें सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करने की भी हिदायत दी है.