देवास-एंट्रिक्स डील मामले में केंद्र सरकार को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. दिल्ली हाईकोर्ट ने इंटरनेशनल चेंबर ऑफ कॉमर्स के ऑर्डर को रद्द कर दिया है. इसमें कहा गया था कि एंट्रिक्स जो कि इसरो की कमर्शल कंपनी है वह देवास मल्टीमीडिया को 560 मिलियन डॉलर ब्याज समेत देगी.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि देवास मल्टीमीडिया ने फ्रॉड किया था. सुनवाई के दौरान कहा गया कि एंट्रिक्स और देवास के बीच के व्यापारिक रिश्ते फ्रॉड पर बने थे.
देवास-एंट्रिक्स डील पर लंबे वक्त से सिसायत गरमाई हुई थी. इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई हुई थी. इसमें सुप्रीम कोर्ट ने देवास (डिजिटल इनहांस्ड, वीडियो एंड ऑडियो सर्विसेज) मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड को बंद करने के आदेश को बरकरार रखा था. साथ ही कहा था कि ये मामला बड़े आकार की धोखाधड़ी का है, जिसे कार्पेट के नीचे खत्म नहीं किया जा सकता. इसके बाद एनडीए सरकार ने इस घोटाले के लिए यूपीए सरकार को घेरा था.
देवास-एंट्रीक्स डील क्या है?
- देवास एक मल्टीमीडिया कंपनी थी, जिसका गठन 2004 में हुआ था. ये कंपनी बेंगलुरु स्थित एक स्टार्टअप थी. इसने 2005 में ISRO की कमर्शियल कंपनी एंट्रिक्स के साथ सैटेलाइट को लेकर एक डील की.
- इस डील के तहत देवास को एंट्रिक्स को सेवाएं देने के लिए बैंडविड्थ दिया गया था. एंट्रिक्स को दो सैटेलाइट बनाना और उसे लॉन्च करना था. उसकी 90% सैटेलाइट ट्रांसपोडर क्षमता देवास को देना था.
- इस सौदे में एक हजार करोड़ रुपये की लागत के 70 मेगाहर्ट्ज के S-बैंड स्पेक्ट्रम भी शामिल थे. इस स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल सिर्फ सुरक्षाबलों और सरकारी टेलीकॉम कंपनियों के ही होना था.
- इस सौदे पर सवाल उठे. इसके बाद 2011 में यूपीए सरकार ने इस डील को रद्द कर दिया.
- एंट्रिक्स ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) का रुख किया और आरोप लगाया कि इसरो के तत्कालीन चेयरमैन जी. माधवन नायर समेत सीनियर अफसरों ने देवास को गैर-कानूनी तरीके से कॉन्ट्रैक्ट दिया.
- NCLT ने देवास को बंद करने का आदेश दिया. इसके बाद सितंबर 2021 में मामला नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) पहुंचा. NCLAT ने NCLT के फैसले को बरकरार रखा.
- बाद में एंट्रिक्स इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची. सुप्रीम कोर्ट ने भी NCLAT के फैसले को बरकरार रखा और इस डील को धोखाधड़ी बताया.