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आंध्र प्रदेश की राजधानी बनेगा अमरावती, संसद में 1 अप्रैल को बिल लाने की तैयारी में सरकार

आंध्र प्रदेश की विधानसभा ने 28 मार्च को सर्वसम्मति से अमरावती को राजधानी बनाने का प्रस्ताव पारित किया था. अब केंद्र सरकार भी आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल में संशोधन कर अमरावती को राजधानी के रूप में कानूनी मान्यता देने की तैयारी में है.

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आंध्र प्रदेश की विधानसभा से पारित हो चुका है अमरावती को राजधानी बनाने का प्रस्ताव (Photo: ITG)
आंध्र प्रदेश की विधानसभा से पारित हो चुका है अमरावती को राजधानी बनाने का प्रस्ताव (Photo: ITG)

आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, दोनों राज्यों की राजधानी हैदराबाद हुआ करता था. हुआ करता था हम इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि अब अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में मान्यता देने की पूरी तैयारी हो गई है. आंध्र प्रदेश की विधानसभा ने 28 मार्च को ही इससे संबंधित प्रस्ताव पारित कर दिया था. अब केंद्र सरकार भी आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2026 लाने की तैयारी में है. यह बिल एक अप्रैल को लोकसभा में आएगा.

जानकारी के मुताबिक आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) बिल लाने के पीछे सरकार की मंशा अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी के रूप में मान्यता देना है. इस संशोधन के जरिये आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल में एक लाइन जोड़ी जाएगी- अमरावती, आंध्र प्रदेश की नई राजधानी होगी.  गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश की विधानसभा से 28 मार्च को सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ था कि अमरावती प्रदेश की एकमात्र राजधानी हो.

यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने विधानसभा में रखा था और सत्तापक्ष-विपक्ष, सभी दलों के विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया था. यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने के बाद गृह मंत्री के साथ ही लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के सभापति को भी भेज दिया गया था. अब अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाए जाने के साथ ही इस मुद्दे पर वर्षों से चली आ रही कानूनी लड़ाई पर भी ब्रेक लग जाएगा.

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आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया है कि हर तरह का असमंजस हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. बता दें कि साल 2014 में आंध्र प्रदेश का पुनर्गठन हुआ था और तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था. हैदराबाद, आंध्र प्रदेश की राजधानी हुआ करता था. आंध्र प्रदेश पुनर्गठन बिल में यह प्रावधान किया गया था कि हैदराबाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, दोनों राज्यों की राजधानी रहेगा.

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तब यह प्रावधान किया गया था कि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना, दोनों राज्यों के लिए संयुक्त राजधानी की यह व्यवस्था अधिकतम 10 वर्षों के लिए ही होगी. इसके बाद हैदराबाद, तेलंगाना में शामिल हो जाएगा और आंध्र प्रदेश को अपने लिए नई राजधानी का निर्माण करना होगा.

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