सोमवार रात झारखंड के चतरा जिले में एयर एम्बुलेंस के दर्दनाक हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई. वहीं इससे कुछ हफ्ते पहले 28 जनवरी को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार के विमान से जुड़ा एक मामला सामने आया था. इन दोनों घटनाओं के बीच इंडिया टुडे को मिली एक RTI के जवाब ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. क्या देश का एविएशन रेगुलेटर DGCA सुरक्षा निगरानी के लिए पर्याप्त स्टाफ के साथ काम कर रहा है?
यह RTI 28 जनवरी को अजित पवार के विमान से जुड़े घटनाक्रम के बाद दाखिल की गई थी. इसमें DGCA से नॉन-शेड्यूल ऑपरेटर्स (NSOPs) की ऑडिट डिटेल, एक्सपायर हो चुके एयरक्राफ्ट पार्ट्स के इस्तेमाल के मामले, पुराने हादसों की जांच रिपोर्ट और विभाग में स्टाफ की स्थिति की जानकारी मांगी गई थी. हालांकि DGCA ने ऑपरेशनल डिटेल साझा नहीं की, लेकिन जो स्टाफिंग आंकड़े सामने आए हैं, वे चिंताजनक हैं.
सोमवार का हादसा: क्या हुआ था?
सोमवार रात रेडबर्ड एयरवेज का बीचक्राफ्ट C90 (VT-AJV) एयर एम्बुलेंस के रूप में रांची से दिल्ली जा रहा था. यह विमान झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास क्रैश हो गया. DGCA के मुताबिक, विमान ने कोलकाता से संपर्क के बाद खराब मौसम की वजह से रूट बदलने की मांग की थी. शाम 7 बजकर 34 मिनट पर विमान का संपर्क और रडार ट्रैकिंग दोनों टूट गए.
स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि आंधी-तूफान हादसे की वजह हो सकता है, हालांकि जांच जारी है. विमान में दो क्रू मेंबर, एक मरीज और उसके परिजन समेत कुल सात लोग सवार थे. सभी की मौत हो गई. इस हादसे के बाद एक बार फिर एयर एम्बुलेंस और नॉन-शेड्यूल उड़ानों की निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे हैं.
RTI में क्या पूछा गया था?
RTI में जनवरी 2023 से दिसंबर 2025 के बीच DGCA द्वारा नॉन-शेड्यूल ऑपरेटर्स की सुरक्षा जांच, ऑडिट, बड़े उल्लंघन और की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी गई थी. इसके अलावा पूछा गया था कि कितनी बार विमान या हेलीकॉप्टर के पार्ट्स तय एक्सपायरी के बाद इस्तेमाल किए गए, किन ऑपरेटर्स पर कार्रवाई हुई, किसे सस्पेंड या ग्राउंड किया गया.
सितंबर 2023 में VSR वेंचर्स के लियरजेट 45 हादसे को लेकर DGCA की जांच रिपोर्ट, पायलट ट्रेनिंग और अनस्टेबल अप्रोच जैसे मुद्दों पर क्या निष्कर्ष निकले, यह भी जानकारी मांगी गई थी. साथ ही यह भी पूछा गया था कि क्या उस ऑपरेटर पर पहले से कोई विशेष निगरानी थी.
DGCA ने क्या जवाब दिया?
DGCA ने अपने जवाब में कहा कि संबंधित CPIO सिर्फ ग्रुप 'A' टेक्निकल अफसरों के कैडर मैनेजमेंट से जुड़ा है और मांगी गई जानकारी उसके रिकॉर्ड में नहीं है. आवेदन को अन्य संबंधित CPIO को भेज दिया गया है.
स्टाफिंग के आंकड़े जो चौंकाते हैं
हालांकि ऑपरेशनल जानकारी नहीं दी गई, लेकिन DGCA की सुरक्षा शाखाओं में स्टाफ की स्थिति के आंकड़े साझा किए गए. जैसे एयरवर्दीनेस विंग में 310 पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 174 भरे हुए हैं. यानी 136 पद खाली, करीब 44% की कमी है. यह विंग विमान की मेंटेनेंस और तकनीकी मानकों की निगरानी करता है.
एयर सेफ्टी विंग में 116 स्वीकृत पदों में से 86 भरे हैं. 30 पद खाली हैं, यानी 25% से ज्यादा की कमी. यही विंग सुरक्षा ऑडिट और निगरानी का काम देखता है.
सर्विलांस एंड एन्फोर्समेंट डिवीजन में हैरानी की बात यह है कि यहां कोई भी पद आधिकारिक रूप से स्वीकृत नहीं है, लेकिन सात लोग इस डिवीजन में काम कर रहे हैं.
एयर एम्बुलेंस हादसे और हालिया विमान घटनाओं के बीच सामने आए ये आंकड़े यह सवाल खड़ा करते हैं कि क्या एविएशन सेफ्टी की निगरानी के लिए देश का रेगुलेटर पर्याप्त संसाधनों के साथ काम कर रहा है या नहीं.