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केमिस्ट्स की हड़ताल का कैसा दिख रहा असर? दिल्ली, लखनऊ-राजकोट-चंडीगढ़ से रिपोर्ट

ऑनलाइन फार्मेसी और कॉर्पोरेट चेन के विरोध में ऑल इंडिया केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने देशव्यापी बंद का एलान किया है. इस बंद के चलते लखनऊ और गुजरात में जहां व्यापक स्तर पर मेडिकल स्टोर बंद रहे, जबकि दिल्ली के आरएमएल अस्पताल के पास दवा की दुकानें खुली हुई हैं, ताकि दवाई लेने आने वाले लोगों को परेशानी न हो.

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चंडीगढ़ में बंद केमिस्ट की दुकानें. (photo: ITG)
चंडीगढ़ में बंद केमिस्ट की दुकानें. (photo: ITG)

ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने ऑनलाइन दवाओं की अनियंत्रित बिक्री, कॉर्पोरेट चेन फार्मेसी द्वारा अत्यधिक डिस्काउंट देने और नशा युक्त दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ बुधवार को देशव्यापी बंद का आयोजन किया है. लखनऊ, अहमदाबाद और दिल्ली सहित कई शहरों में मेडिकल स्टोर बंद रहे, जबकि अस्पतालों के पास जरूरी दवाएं खुली रहीं. AIOCD ने सरकार से GSR 817 अधिसूचना रद्द करने, कोरोना काल के नियम खत्म करने और डीप डिस्काउंटिंग पर रोक लगाने की मांग की.

इस देशव्यापी आंदोलन के तहत लखनऊ में मेडिकल एसोसिएशन और फार्मा एसोसिएशन के आह्वान पर पारंपरिक दवा विक्रेताओं ने अपने मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद रखे. तो गुजरात में अहमदाबाद की 3,000 दुकानों समेत राज्यभर के 35,000 मेडिकल स्टोर्स ने इस हड़ताल को अपना पूर्ण समर्थन दिया है.

वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में इस स्ट्राइक का मिला-जुला असर देखने को मिला, जहां राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल के पास स्थित जरूरी दवा दुकानें आम लोगों के लिए खुली रहीं.

चंडीगढ़ और राजकोट में भी दुकानें बंद

इसी तरह चंडीगढ़ और गुजरात के राजकोट में दवा की दुकानें पूरी तरह बंद हैं. चंडीगढ़ में न्यूरोलॉजी के मरीज वरिंदर सिंह पीजीआई में दवा लेने के लिए मेडिकल स्टोर पहुंचे, लेकिन दुकान बंद थी. इसके बाद उन्होंने आजतक से कहा कि उन्हें हड़ताल की जानकारी नहीं थी और वह अपने पिता के साथ मेडिकल रिपोर्ट लेकर फतेहगढ़ साहिब, पंजाब से आए थे.

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अस्पतालों के पास खुली रहेंगी दुकानें

देशव्यापी बंद के दौरान आम जनता और गंभीर मरीजों को जरूरी दवाओं की खरीद में किसी भी तरह की समस्या न हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया है. एसोसिएशन के फैसले के तहत सभी सिविल अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC), प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) और सभी प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों से जुड़े मेडिकल स्टोर्स को पूरी तरह खुला रखा गया है.

दवा व्यापारियों का साफ कहना है कि ऑनलाइन फार्मेसी के तेजी से बढ़ते चलन के कारण उनके पारंपरिक कारोबार पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है. वो बिना डॉक्टरों के पर्चे के हो रही ऑनलाइन बिक्री और नशीली दवाओं की होम डिलीवरी के सख्त खिलाफ हैं. लखनऊ और अहमदाबाद में व्यापारियों ने अपनी एकजुटता दिखाते हुए केवल बेहद जरूरी आपातकालीन काउंटरों को ही आंशिक रूप से संचालित करने की अनुमति दी.

क्या हैं एसोसिएशन की मांगें

AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जे. एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल के मुताबिक, सरकार की नीतियां खुदरा दवा व्यापारियों के हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं' केमिस्ट एसोसिएशन की तीन प्रमुख मांगें हैं.

एसोसिएशन की पहली मांग है कि GSR 817 अधिसूचना को रद्द किया जाए और सरकार द्वारा ऑनलाइन दवाओं की बिक्री को लेकर जारी की गई अधिसूचना संख्या GSR 817 को तुरंत वापस लिया जाए. इसके लिए नए सिरे से ढांचा तैयार हो.

एसोसिएशन ने कोरोना काल के नियमों को खत्म करने की भी मांग की है. एसोसिएशन का कहना है कि महामारी के दौरान लागू की गई अधिसूचना GSR 220 को पूरी तरह बंद किया जाए.

डीप डिस्काउंटिंग पर रोक: ऑनलाइन कंपनियों द्वारा दिए जा रहे बेतहाशा डिस्काउंट को रोका जाए या फिर ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर (DPCO) में संशोधन कर खुदरा दुकानदारों का मार्जिन बढ़ाया जाए, ताकि वो भी प्रतिस्पर्धा में टिक सकें.

इस हड़ताल को लेकर देशभर में एकमत स्थिति नहीं दिख रही है. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने बताया कि कई राज्य स्तरीय फार्मेसी संगठनों ने सार्वजनिक हित को देखते हुए हड़ताल से दूरियां बना ली हैं.

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