अहमदाबाद विमान क्रैश के लगभग एक साल बाद प्लेन के पायलट को लेकर एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है. जिस मुर्दाघर में हादसे के पीड़ितों के शव रखे गए थे, एक शख्स ने वहां का आंखोंदेखा हाल सुनाया. उसने बताया कि पायलट का शव तब भी विमान के स्टीयरिंग कॉलम (योक) को कसकर पकड़े हुए था.
डेली मेल से बातचीत में चश्मदीद रोमिन वोहरा ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान वो अहमदाबाद सिविल अस्पताल में पैथोलॉजी लैब असिस्टेंट थे. वहां कुछ लोगों से उनकी पहचान थी, इसीलिए, अपने रिश्तेदारों के शवों की पहचान करने के लिए वो मुर्दाघर के अंदर घुसने में कामयाब रहे.
मृतकों में रोमिन वोहरा की चाची यास्मीन, उनका भाई परवेज (जो लंदन में अमेजन में काम करता था) और उनकी तीन साल की भतीजी भी शामिल थीं. रोमिन ने बताया कि अपनी भतीजी के शव की पहचान करने के लिए उसने एक बच्ची की खोपड़ी को भी करीब से देखा था.
मुर्दाघर का दिल दहला देने वाला मंजर
रोमिन ने बताया कि वहां का नजारा किसी नरक से कम नहीं था. फर्श पर एक के बाद एक कई शव रखे हुए थे. कई कटे हुए सिर और अंग बिखरे पड़े थे. एक जली हुई मां की लाश थी, जिसने अपने बच्चे को अभी भी बांहों में दबाया हुआ था.
रोमिन वोहरा ने दावा किया कि मुर्दाघर के एक कोने में इस प्लेन के पायलट-इन-कमांड कैप्टन सुमीत सभरवाल का शव अलग से रखा हुआ था. रोमिन के मुताबिक, 'वो अभी भी बैठने की स्थिति में थे. उनकी पीठ झुलस गई थी, लेकिन उनके शरीर का अगला हिस्सा पूरी तरह ठीक था.'
कैप्टन के हाथों में स्टीयरिंग
उन्होंने बताया कि कैप्टन की चार सोने की पट्टियों वाली सफेद कमीज, काली टाई, पतलून और जूते बिल्कुल वैसे ही थे. सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि कैप्टन सभरवाल के हाथों में विमान का डबल-हैंडल योक (स्टीयरिंग) था, जिसे वो मजबूती से पकड़े हुए थे. ये स्टीयरिंग शायद टक्कर के वक्त या बचावकर्मियों से उन्हें कॉकपिट से निकालते समय टूट गया होगा.
मुर्दाघर में मौजूद एक डॉक्टर ने भी रोमिन के इस दावे का समर्थन किया है. एविएशन विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ये बात सच है, तो ये साबित करता है कि कैप्टन सभरवाल आखिरी सेकेंड तक प्लेन को बचाने की कोशिश कर रहे थे.
पहले पायलट को लेकर आई थी ये रिपोर्ट
पिछले साल 12 जुलाई को आई एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इनवेस्टिगेशन ब्यूरो की शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि उड़ान भरने के तुरंत बाद दोनों इंजनों की ईंधन सप्लाई (फ्यूल सप्लाई) एक-एक सेकेंड के अंतर पर बंद हो गई थी. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद ये कयास लगाए जाने लगे कि हादसा पायलट की गलती की वजह से हुआ होगा.
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हालांकि, कैप्टन सभरवाल के परिवार और पायलट संगठनों ने इस शुरुआती रिपोर्ट पर कड़ा एतराज जताया है. कैप्टन के पिता पुष्कराज सभरवाल और फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है. उनका कहना है कि ये रिपोर्ट उन पायलटों को बदनाम कर रही है जो अब अपना बचाव करने के लिए जिंदा नहीं हैं.