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NTA में 'आधी' तैयारी के भरोसे NEET-JEE? चार नए अधिकारी नियुक्त, लेकिन आधे शीर्ष पद अब भी खाली

नीट-यूजी 2026 पेपर लीक विवाद के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) अब भी स्टाफ की कमी से जूझ रही है. सरकार ने हाल ही में चार नए सीनियर अफसरों की नियुक्ति की है, लेकिन एनटीए के 16 में से 8 शीर्ष पद अब भी खाली हैं. राधाकृष्णन समिति ने एनटीए की संरचनात्मक कमजोरियों और संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता को बड़ा खतरा बताया था.

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एनटीए में 4 नए अधिकारियों की नियुक्ति हुई है लेकिन 16 शीर्ष पदों में से आधे अब भी खाली हैं. (File Photo: PTI)
एनटीए में 4 नए अधिकारियों की नियुक्ति हुई है लेकिन 16 शीर्ष पदों में से आधे अब भी खाली हैं. (File Photo: PTI)

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में NEET-UG पेपर लीक विवाद के बाद शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों के बावजूद शीर्ष स्तर पर स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है. 2024 के पेपर लीक के बाद एजेंसी में 16 नए वरिष्ठ पद बनाए गए थे, लेकिन इनमें से आधे पद खाली हैं. हाल ही में 2026 के NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद केंद्र सरकार ने चार नए वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की है, लेकिन इससे भी एजेंसी की संरचनात्मक चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं.

सरकार ने 1998 बैच की इंडियन स्टैटिस्टिकल सर्विस (ISS) की अधिकारी अनुजा बापट और 2004 बैच की  इंडियन ​रेवेन्यू सर्विस (IRS) की अधिकारी रुचिता विज को एनटीए में जॉइंट सेक्रेटरी के रूप में नियुक्त किया है. इसके अलावा 2013 बैच के इंडियन रेवेन्यू सर्विस (IRS) के अधिकारी आकाश जैन और इंडियन ऑडिट एंड अकाउंट्स सर्विस (IA&AS) के अधिकारी आदित्य राजेंद्र भोजगढिया को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत जॉइंट डायरेक्टर बनाया गया है.

अक्टूबर 2024 में NEET-UG पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद एनटीए के ढांचे में बड़े बदलाव किए गए थे. पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय समिति ने एजेंसी में व्यापक सुधारों की सिफारिश की थी. समिति की सिफारिशों के आधार पर आठ निदेशक और आठ संयुक्त निदेशक स्तर के कुल 16 नए पद बनाए गए थे. राधाकृष्णन समिति ने एनटीए में 10 फंक्शनल वर्टिकल बनाने, हर वर्टिकल का नेतृत्व डायरेक्टर लेवल के अधिकारी से कराने, स्थायी और जवाबदेह स्टाफिंग व्यवस्था विकसित करने और संविदा कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने की जरूरत बताई थी.

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राधाकृष्णन समिति ने दिए थे अहम सुझाव

समिति ने यह भी कहा था कि एजेंसी की निगरानी के लिए एक मजबूत गवर्निंग बॉडी बनाई जानी चाहिए. हालांकि सुधारों की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाई है. मार्च 2025 में राज्यसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक, जॉइंट डायरेक्टर लेवल के आठ पदों में से पहले तीन अधिकारियों- अर्चना शुक्ला, अमित कुमार और शिवानी ने दिसंबर 2024 में कार्यभार संभाला था. अब आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगढिया की नियुक्ति के बाद जॉइंट डायरेक्टर के कुल पांच पद भरे जा चुके हैं, जबकि तीन अब भी खाली हैं.

वहीं डायरेक्टर लेवल के आठ पदों में से अब तक केवल तीन ही भरे जा सके हैं. संदीप कुमार मिश्रा की नियुक्ति दिसंबर 2024 में हुई थी, जबकि पवन कुमार शर्मा और विजयकुमार विनायक राव पाटिल ने मार्च 2025 में पदभार संभाला. विशेषज्ञों का मानना है कि NTA के शीर्ष प्रशासनिक ढांचे में 50 प्रतिशत पदों का खाली रहना चिंता का विषय है, खासकर तब जब एजेंसी NEET और JEE जैसी देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं का संचालन करती है.

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संविदा कर्मियों पर निर्भरता बड़ी कमजोरी

राधाकृष्णन समिति ने अपनी रिपोर्ट में संविदा कर्मचारियों पर अत्यधिक निर्भरता को एजेंसी की बड़ी कमजोरी बताया था और चेतावनी दी थी कि इससे परीक्षा प्रणाली में हेरफेर की संभावना बढ़ जाती है. हालिया नियुक्तियों को एजेंसी की प्रशासनिक क्षमता मजबूत करने की दिशा में उठाया गया जरूरी कदम माना जा रहा है, लेकिन खाली पदों को भरने में हो रही देरी सरकार और एनटीए दोनों के सामने गंभीर सवाल खड़े कर रही है. सरकार पर रिक्त आठ पदों को जल्द भरने का दबाव लगातार बढ़ रहा है.

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