नासिक के TCS बीपीओ में कर्मचारियों को हिंदू से मुस्लिम धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश और यौन उत्पीड़न के मामले ने अब एक नया मोड़ ले लिया है. जांच की जा रही है कि यह पूरा 'खेल' कहीं बाहरी लोगों द्वारा संचालित तो नहीं हो रहा था. इसकी तह तक जाने के लिए पुलिस ने अब गिरफ्तार सभी आरोपियों के बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है. यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इन कर्मचारियों को सिर्फ TCS की सैलरी मिल रही थी या इसके अलावा भी कहीं से पैसा आ रहा था ?
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आरोपियों के बैंक खातों का पूरा ब्यौरा बैंकों से मांगा गया है. इसमें उनकी सैलरी, ट्रांजैक्शन हिस्ट्री और बाहरी स्रोतों से आने वाले पैसों की जांच की जा रही है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपियों को किसी और जगह से फंडिंग मिल रही थी, जिसका इस्तेमाल ऑफिस के अंदर गतिविधियों को चलाने में किया जा रहा हो. सूत्र बताते हैं कि जांच का दायरा केवल एक-दो लोगों तक सीमित नहीं है. सभी टीम लीडर्स और संबंधित कर्मचारियों के खातों की बारीकी से जांच की जा रही है. इसमें सबसे अहम कड़ी मानी जा रही है निदा खान. क्योंकि आरोप है कि वह केवल एचआर की भूमिका में नहीं थी, बल्कि पूरे नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रही थी.
SIT की जांच में नया एंगल
इस पूरे मामले की जांच के लिए पहले ही एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जा चुका है. शुरुआत में SIT का फोकस शिकायतों की पुष्टि और आरोपियों की भूमिका तय करने पर था, लेकिन अब जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है. अब SIT यह समझने की कोशिश कर रही है कि क्या यह पूरा मामला सिर्फ व्यक्तिगत स्तर का था या इसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था. इसी कड़ी में बैंक खातों की जांच को अहम माना जा रहा है. एक अधिकारी ने बताया कि अगर सैलरी के अलावा किसी अन्य स्रोत से पैसे आने के सबूत मिलते हैं, तो मामला और गंभीर हो सकता है.
निदा खान अब भी फरार
निदा खान का नाम एफआईआर में शुरुआत से ही सामने आया था. आरोप है कि वह उन टीम लीडर्स का समर्थन करती थी, जिन पर महिला कर्मचारियों के उत्पीड़न और धर्मांतरण के प्रयास के आरोप हैं. अब जब बैंक खातों की जांच शुरू हुई है, तो उसकी भूमिका और भी अहम हो गई है. पुलिस के मुताबिक, निदा खान अभी फरार है और उसकी तलाश जारी है. माना जा रहा है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद ही कई सवालों के जवाब मिल पाएंगे
कितने लोग गिरफ्तार, किस पर क्या आरोप
अब तक पुलिस ने टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के सात कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है. इनमें छह पुरुष और एक महिला ऑपरेशंस मैनेजर शामिल हैं. गिरफ्तार आरोपियों में दानिश शेख, तौसीफ अटार, रज़ा मेमन, शाहरुख कुरैशी, शफी शेख और आसिफ आफताब अंसारी के नाम सामने आए हैं. इन सभी पर महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न, धार्मिक दबाव और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयास जैसे गंभीर आरोप लगे हैं. जांचकर्ताओं के अनुसार, इन सभी को कंपनी ने निलंबित भी कर दिया है.
शिकायतों से खुला मामला, HR पर भी सवाल
इस पूरे मामले की शुरुआत महिला कर्मचारियों की शिकायतों से हुई थी. कुल आठ महिला कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनके साथ मानसिक और यौन उत्पीड़न किया गया. सबसे बड़ी बात यह रही कि इन शिकायतों को नजरअंदाज किया गया. आरोप है कि एचआर विभाग तक बात पहुंचने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. यहीं से HR की भूमिका पर सवाल खड़े होने लगे.
निदा ने ऐसे किया था साथियों का बचाव
इस पूरे मामले में एचआर की भूमिका भी सवालों के घेरे में है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने बताया कि एक महिला अधिकारी ने पीड़िता को शिकायत दर्ज करने से मना भी किया और कहा कि ऐसी बातें होती रहती हैं. आरोप है कि इस रवैये के कारण कई मामलों में कार्रवाई नहीं हो सकी. जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा था, जिसके जरिए कर्मचारियों को टारगेट किया जाता था. पीड़ितों का कहना है कि इस ग्रुप में भी निदा खान शामिल थी. एफआईआर के मुताबिक, कुछ मामलों में कर्मचारियों को जबरन नमाज पढ़ने, मांसाहारी भोजन करने और धार्मिक प्रतीकों को अपनाने के लिए दबाव डाला गया. एक पीड़ित ने बताया कि उसे टोपी पहनाकर नमाज पढ़वाई गई और उसकी फोटो भी ली गई. महिला कर्मचारियों के साथ यौन उत्पीड़न के कई गंभीर आरोप सामने आए हैं. इनमें छेड़छाड़, अश्लील टिप्पणियां, जबरन नजदीकी बनाने की कोशिश और पर्सनल लाइफ पर टिप्पणी शामिल हैं. कुछ मामलों में शादी का झांसा देकर संबंध बनाने के आरोप भी लगे हैं.
कंपनी का बयान और आंतरिक जांच
मामले के सामने आने के बाद TCS ने साफ कहा है कि कंपनी किसी भी प्रकार के उत्पीड़न और जबरदस्ती के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाती है. कंपनी ने आरोपियों के निलंबन की पुष्टि की है और कहा है कि मामले की आंतरिक जांच भी चल रही है. टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने इस पूरे मामले को गंभीर और पीड़ादायक बताया है. उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने लाने के लिए गहन जांच की जा रही है और इसके लिए टीसीएस की मुख्य परिचालन अधिकारी आरती सुब्रमणियन के नेतृत्व में जांच की जा रही है है.