खाड़ी इलाके में चल रहे युद्ध के हालात ने पुणे में ज़रूरी सेवाओं पर असर डालना शुरू कर दिया है. महाराष्ट्र के पुणे में सबसे बड़े श्मशान घाट वैकुंठ धाम श्मशान घाट में गैस आधारित अंतिम संस्कार के लिए इस्तेमाल होने वाली एलपीजी की कमी हो गई है.
पुणे नगर निगम (Pune Municipal Corporation) के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर निलेश कालेकर के मुताबिक श्मशान घाट में फिलहाल केवल दो अंतिम संस्कार के लिए ही गैस उपलब्ध है. उन्होंने बताया कि एक अंतिम संस्कार के लिए लगभग 18 किलोग्राम एलपीजी की आवश्यकता होती है.
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गैस की कमी से बंद हुए गैस आधारित दाह संस्कार
वैकुंठ धाम में कुल तीन गैस आधारित दाह संस्कार इकाइयां और चार इलेक्ट्रिक शवदाह गृह मौजूद हैं. लेकिन एलपीजी की आपूर्ति में कमी के कारण फिलहाल गैस आधारित अंतिम संस्कार पूरी तरह से रोक दिए गए हैं.
अधिकारियों के अनुसार अब अधिकांश अंतिम संस्कार इलेक्ट्रिक शवदाह गृहों में किए जा रहे हैं. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि गैस की आपूर्ति सामान्य होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी.
केंद्र सरकार की अधिसूचना से प्रभावित हुई आपूर्ति
निलेश कालेकर ने बताया कि यह कमी केंद्र सरकार की उस अधिसूचना के कारण हुई है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच घरेलू एलपीजी आपूर्ति को बाधित होने से बचाने के लिए वाणिज्यिक एलपीजी की आपूर्ति को सीमित किया गया है.
इसी वजह से वैकुंठ धाम प्रशासन को एलपीजी की नई आपूर्ति नहीं मिल पाई है, जिससे गैस आधारित दाह संस्कार सेवाएं प्रभावित हुई हैं.
नागरिकों को जारी की गई आधिकारिक सूचना
इस स्थिति को देखते हुए पुणे नगर निगम ने नागरिकों के लिए आधिकारिक सूचना जारी की है, जिसमें गैस की कमी और अस्थायी रूप से इलेक्ट्रिक दाह संस्कार व्यवस्था लागू होने की जानकारी दी गई है.
नवी पेठ इलाके में स्थित वैकुंठ धाम करीब 17 एकड़ में फैला हुआ है और इसे महाराष्ट्र का सबसे बड़ा हिंदू श्मशान घाट माना जाता है. यहां औसतन हर दिन करीब 20 अंतिम संस्कार किए जाते हैं. अधिकारियों के मुताबिक अगली सूचना तक गैस आधारित दाह संस्कार इकाइयां बंद रहेंगी और सेवाएं फिलहाल इलेक्ट्रिक शवदाह गृहों के जरिए जारी रहेंगी.