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तेज और सुरक्षित सफर... कितना खास है मुंबई-पुणे के बीच शुरू हो रहा 'मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट'

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबे समय से प्रतीक्षित मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट 1 मई से शुरू हो रहा है, जो यात्रा समय को लगभग 30 मिनट कम करेगा और दूरी में 6 किलोमीटर की कमी लाएगा.

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मुंबई पुणे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट 1 मई से शुरू हो रहा है
मुंबई पुणे मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट 1 मई से शुरू हो रहा है

मुंबई और पुणे के बीच यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है. मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर लंबे समय से बनने के इंतजार ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट अब 1 मई से शुरू होने जा रहा है. इसके शुरू होते ही इस नए रूट पर धीरे-धीरे ट्रैफिक चालू किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट का मकसद यात्रा का समय कम करना और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना है.

1 मई से हो रहा शुरू, अभी केवल हल्के वाहन चलेंगे
राज्य परिवहन विभाग ने इस रूट के इस्तेमाल को लेकर नियम और शर्तें भी जारी कर दी हैं. शुरुआती चरण में, यानी 1 मई से 31  अक्टूबर तक, इस मार्ग पर सिर्फ हल्के वाहन, बसें और यात्री वाहन ही चल सकेंगे. इस दौरान ट्रैफिक, सुरक्षा और संचालन की पूरी निगरानी की जाएगी. इसके बाद 1 नवंबर से, समीक्षा के आधार पर, मालवाहक वाहनों को भी अनुमति दी जा सकती है.

हालांकि, ज्वलनशील, विस्फोटक या अन्य खतरनाक सामान ले जाने वाले वाहनों को इस प्रोजेक्ट के टनल से गुजरने की अनुमति नहीं होगी. ऐसे वाहनों को पुराने एक्सप्रेसवे का ही इस्तेमाल करना होगा.

तय की गई है स्पीड लिमिट
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए स्पीड लिमिट भी तय की गई है. कारें अधिकतम 100 किमी/घंटा और बसें व अन्य यात्री वाहन 80 किमी/घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के तहत सख्त कार्रवाई होगी. यह प्रोजेक्ट करीब 13.3 किलोमीटर लंबा है और लोनावला–खंडाला के भीड़भाड़ वाले घाट सेक्शन को बायपास करता है. यह हिस्सा लंबे समय से ट्रैफिक जाम और हादसों के लिए जाना जाता रहा है, जहां रोजाना करीब 1.5 लाख वाहन गुजरते हैं.

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दुनिया के सबसे चौड़े टनल में से एक
इस प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत इसके दो विशाल टनल हैं, जिनकी लंबाई 1.68 किमी और 8.87 किमी है. करीब 23.75 मीटर चौड़े ये टनल दुनिया के सबसे चौड़े टनलों में गिने जाते हैं. इन्हें बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में बनाया गया है, जिसमें लोनावला झील के नीचे से गुजरने वाला हिस्सा भी शामिल है. टनलों में आधुनिक सुरक्षा सुविधाएं लगाई गई हैं, जैसे उन्नत वेंटिलेशन सिस्टम, फायर फाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी SOS और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम, ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके.

केबल-ब्रिज भी है खास आकर्षण
इस प्रोजेक्ट में टाइगर वैली पर बना केबल-स्टेड ब्रिज भी खास आकर्षण है. करीब 182 मीटर ऊंचा यह पुल भारत के सबसे ऊंचे पुलों में शामिल है. इसे भारी बारिश, तेज हवाओं और भूस्खलन जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (MSRDC) द्वारा तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 6,695 करोड़ रुपये है. खास बात यह है कि इसके शुरू होने के बाद टोल में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी.

मुंबई-पुणे के बीच सफऱ में लगेगा कम समय
इस प्रोजेक्ट से मुंबई–पुणे के बीच यात्रा समय लगभग 30 मिनट कम हो जाएगा, जबकि दूरी करीब 6 किलोमीटर घट जाएगी. बेहतर ट्रैफिक फ्लो से रोजाना करीब 9 करोड़ रुपये के ईंधन की बचत का अनुमान है. साथ ही इसे 'जीरो फेटालिटी कॉरिडोर' के रूप में विकसित किया गया है, जहां स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम से नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा.

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यह प्रोजेक्ट इसलिए जरूरी हुआ क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में इस रूट पर ट्रैफिक तेजी से बढ़ा है. जो एक्सप्रेसवे कभी तेज और आसान यात्रा के लिए बनाया गया था, वह अब खासकर घाट सेक्शन में काफी भीड़भाड़ वाला हो गया है. ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट से न सिर्फ यात्रा आसान होगी, बल्कि यह नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट जैसे अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स के साथ कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाएगा.

कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट देश के सबसे व्यस्त हाईवे में से एक को नई दिशा देने वाला साबित होगा, जहां सरकार ने सुरक्षा, सुविधा और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे तैयार किया है.

मिसिंग लिंक के प्रमुख फायदे

1.वाहन 100 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चल सकेंगे
2. सफर ज्यादा स्मूद और सुरक्षित होगा
3. “जीरो फेटालिटी कॉरिडोर” के रूप में विकसित
4. यात्रा समय में लगभग 30 मिनट की कमी

5. रोजाना करीब ₹9 करोड़ ईंधन की बचत
6. आधुनिक एयर क्वालिटी और सेफ्टी सिस्टम (SOS, PA सिस्टम)
7. टनलों में आधुनिक फायर फाइटिंग और वेंटिलेशन सिस्टम
8. इंटेलिजेंट ट्रैफिक मॉनिटरिंग सिस्टम (ITMS)

मिसिंग लिंक प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं

खोपोली एग्जिट से सिंहगढ़ इंस्टीट्यूट, लोनावला तक रूट
कुल लागत: ₹6,695.30 करोड़
टाइगर वैली पर भारत का सबसे ऊंचा केबल-स्टेड ब्रिज
खालापुर–खोपोली सेक्शन में 8 लेन एक्सपेंशन (8.58 किमी)
कुल लंबाई: 13.3 किमी
टनल जमीन से लगभग 180 मीटर नीचे
हर 300 मीटर पर सेफ्टी क्रॉस-पैसेज

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टनल्स:

1.68 किमी
8.87 किमी

ब्रिज:

650 मीटर

640 मीटर

केबल-स्टेड ब्रिज की ऊंचाई: 182 मीटर

पुराने घाट सेक्शन की लंबाई: 19 किमी

नई दूरी में लगभग 6 किमी की कमी

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