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मुंबई मेयर चुनाव का काउंटडाउन आज से शुरू, बीजेपी में किसकी लगेगी लॉटरी, शिंदे को कैसे साधेगी

मुंबई का नगर निगम देश ही नहीं एशिया की सबसे अमीर लोकल काउंसिल मानी जाती है. बीएमसी मेयर और डिप्टीमेयर के लिए 11 फरवरी को चुनाव है. बीजेपी से लेकर शिंदे और उद्धव ठाकरे की शिवेसना ने अपने-अपने सियासी दांव चलने शुरू कर दिए हैं. देखना होगा कि बीजेपी कैसे सियासी बैलेंस बनाकर अपना कब्जा जमाती है?

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मुंबई मेयर चुनाव में बीजेपी और एकनाथ शिंदे में कैसे बनेगा बैलेंस (Photo-ANI)
मुंबई मेयर चुनाव में बीजेपी और एकनाथ शिंदे में कैसे बनेगा बैलेंस (Photo-ANI)

महाराष्ट्र के नगर महापालिका चुनाव नतीजे आने के तीन हफ्ते के बाद अब मुंबई में बीएमसी के मेयर चुनाव काउंटडाउन शुरू हो गया है. मुंबई से सटे सभी शहरों में मेयर चुने जाने के बाद अब कहीं जाकर बीएमसी की बारी है. बीएमसी मेयर पद के लिए 11 फरवरी को चुनाव है, जिसके लिए नामांकन प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो रही है. ऐसे में सभी की निगाहे लगी है कि मुंबई का नया मेयर कौन होगा? 

मुंबई का मेयर पद सामान्य वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है. ऐसे में मेयर के लिए 6 फरवरी से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो रही है और 7 फरवरी तक चलेगी.  इसके बाद 11 फरवरी को नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि है और उसी दिन मेयर और डिप्टीमेयर के लिए चुनाव होंगे. 

बीएमसी चुनावों में बीजेपी 89 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन उसे अकेले दम पर बहुमत नहीं मिला है.  ऐसे में बीजेपी की सहयोगी शिवसेना (शिंदे) को 29 सीटें मिली हैं, जिसका समर्थन हासिल कर अपने मेयर बना सकती है. ऐसे में देखना है कि बीजेपी कैसे शिंदे के साथ बैलेंस बनाकर अपना मेयर बनाती है? 

बीएमसी का मेयर चुनाव बना रोचक
मुंबई के 227 सीटों वाली बीएमसी में मेयर के लिए 114 नगर सेवकों की जरूरत होती है. बीएमसी में बीजेपी के पास सबसे अधिक 89 नगर सेवक हैं जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के पास 29 पार्षद हैं. वहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के पास 65 नगर सेवक हैं तो कांग्रेस के पास 24 सीटें है. 

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शरद पवार की पार्टी एनसीपी के पास महज एक पार्षद है तो अजित पवार की एनसीपी के 3 पार्षद हैं. राज ठाकरे की पार्टी मनसे के 6 पार्षद हैं तो असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) के 8  और समाजवादी पार्टी के 2 पार्षद हैं. 

मुंबई में बीजेपी-शिवसेना (शिंदे) गठबंधन को कुल मिलाकर 118 नगर सेवक हो रहे हैं. इस तरह से महायुति को स्पष्ट बहुमत का नंबर होने के बावजूद मेयर पद के लिए दोनों की सहमति  नहीं बन पा रही है. वहीं, उद्धव ठाकरे ने भी मेयर के लिए अपनी पार्टी के उम्मीदवार उतारने का ऐलान करके मुकाबले को रोचक बना दिया है.

शिंदे-बीजेपी में कैसा बनेगा फॉर्मूला
बीएमसी चुनाव के नतीजे ऐसे आए हैं कि कोई भी पार्टी अपने दम पर अपना मेयर बनाने की स्थिति में नहीं है. मुंबई चुनाव में बीजेपी भले ही सबसे ज्यादा सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी हो, लेकिन मेयर की कुर्सी पर कब्जा जमाने के लिए एकनाथ शिंदे की बैसाखी की जरूरत होगी. शिदे बीएमसी में 29 पार्षद लेकर किंगमेकर के रोल में है, जिनके समर्थन के बिना बीजेपी के सियासी मंसूबे के कामयाब नहीं होंगे. 

बीजेपी अजित पवार की एनसीपी के पार्षद को मिलाकर भी अपना मेयर नहीं बना सकती है. ऐसे में शिंदे के साथ ही सहमति का फॉर्मूला बनाना होगा. शिंदे भी मुंबई में अपना मेयर चाहते हैं, जिसके लिए सार्वजनिक रूप से मांग भी उठा चुके हैं. ऐसे में बीजेपी बीएमसी में कब्जा जमाने के लिए डिप्टीमेयर का पद शिंदे की शिवसेना को देने का ऑफर दे सकती है. इसके बाद ही बीजेपी अपना मेयर बना पाएगी, लेकिन उसके लिए शिंदे की रजामंदी जरूरी है. 

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उद्धव ठाकरे का क्या है सियासी गेम 
मुंबई के मेयर पद लेकर उद्धव ठाकरे खेमा एक्टिव है.  शिवसेना (यूबीटी) मुंबई मेयर और उपमेयर पद के लिए अपने उम्मीदवार उतारने का दांव चल सकती है. मेयर चुनाव को लेकर शुक्रवार दोपहर मातोश्री में पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, शिवसेना (UBT) के मुंबई के विधायक और कुछ प्रमुख पार्षद मौजूद रहेंगे. 

मेयर चुनाव को लेकर इसी बैठक में यह अंतिम फैसला लिया जाएगा कि पार्टी बीएमसी में अपना उम्मीदवार उतारेगी या नहीं. बीएमसी में शिवसेना(यूबीटी) के नेता किशोरी पेडणेकर ने व्हीप जारी कर सभी पार्षदों को 11 फरवरी तक मुंबई से बाहर नहीं जाने के आदेश दिए हैं. संजय राउत ने दावा किया है कि शिवसेना खेमे के कई पार्षद और एकनाथ शिंदे खुद भी नहीं चाहते हैं कि मुंबई में बीजेपी का मेयर बने? 

बीएमसी में विपक्ष भी नहीं कमजोर

संजय राउत ने दावा किया है कि वे बहुमत के जादुई आंकड़े 114 से महज 6 कदम दूर हैं. राउत के मुताबिक उनके पास 108 का आंकड़ा है, उद्धव गुट (65), कांग्रेस (24), शरद पवार की एनसीपी और अन्य छोटे दलों को मिलाकर भी यह आंकड़ा 108 तक नहीं पहुंचता. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM भी पर्दे के पीछे से उद्धव ठाकरे को समर्थन देने को तैयार है?

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बीजेपी में किसकी लगेगी लाटरी?
मुंबई बीएमसी में नंबर गेम के लिहाज से बीजेपी का मेयर बनना तय माना जा रहा है. ऐसे में सवाल यही है कि बीजेपी की कौन सी महिला नेता मुंबई की मेयर बनेगी. इसके लिए कई नाम सुर्खियों में है. बीजेपी के भीतर तीन नाम चर्चाओं में छाए हुए हैं. इसके में हर्षिता नरवेकर, ऋतु तावड़े और शीतल गंभीर के नाम की चर्चा है. मुंबई बीजेपी का एक गुट ऋतु तावड़े का पुरजोर समर्थन कर रहा है, जबकि विधानसभा अध्यक्ष राहुल नरवेकर अपनी भाभी हर्षिता नरवेकर को मेयर बनाने के लिए पूरी ताकत लगाए हुए हैं. 

वहीं, बीजेपी में एक धड़ा ऐसा है कि जो यह मांग कर रहा है कि पार्टी के मूल कैडर को ही मेयर बनाया जाए. नरवेकर, तावड़े और गंभीर तीनों ही बीजेपी के मूल सदस्य नहीं हैं, बल्कि अन्य पार्टियों से आकर बीजेपी में शामिल हुए हैं. ये नेता जोर देकर कहते हैं कि महापौर का पद ऐसी महिला को मिलना चाहिए जिसने मुंबई में भाजपा संगठन के भीतर वर्षों तक काम किया हो. ऐसे में देखना है कि बीजेपी किस पर दांव खेलती है? 

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