भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भीषण लू (Heatwave) की चेतावनी जारी की है. पूरे राज्य में लोग गर्मी के प्रकोप से बेहाल है. खासकर पुणे में दिन का तापमान 43 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है और रातें भी असामान्य रूप से गर्म हो रही हैं. IMD के अनुसार, विदर्भ में 16 मई तक, कोंकण, गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात में 14 मई तक तथा मराठवाड़ा में 15 मई तक लू की स्थिति बनी रहने की संभावना है. पुणे शहर पिछले कई दिनों से गंभीर गर्मी की चपेट में है. कई इलाकों में अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया जा रहा है.
पुणे के शहरी इलाकों में न्यूनतम तापमान भी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया है. मगरपट्टा में न्यूनतम तापमान 28.1 डिग्री सेल्सियस, कोरेगांव पार्क में 27.6 डिग्री, लोहेगांव में 27 डिग्री और शिवाजीनगर में 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है. वहीं, हरे-भरे और कम भीड़ वाले इलाकों में तापमान काफी कम रहा. एनडीए में 21.8 डिग्री, लवले में 23.7 डिग्री और पाषाण में 24.2 डिग्री सेल्सियस ही न्यूनतम तापमान रहा.
मौसम विशेषज्ञ डॉ. सनप ने इस अंतर को शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव (Urban Heat Island Effect) बताते हुए कहा कि कंक्रीट की इमारतें, एस्फाल्ट वाली सड़कें, वाहनों से निकलने वाले धुएं और घटती हरियाली दिन भर में गर्मी को सोख लेती हैं और रात में धीरे-धीरे छोड़ती हैं. इससे घनी आबादी वाले इलाकों में सूर्यास्त के बाद भी गर्मी बनी रहती है, जबकि खुले और हरे-भरे इलाकों के तापमान में गिरावट आ जाती है.
आ रहा है मॉनसून...भीषण गर्मी और बढ़ते तापमान से मिलेगा सुकून, कई राज्यों में बारिश का अलर्ट
लगातार बढ़ती गर्मी और गर्म रातों ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है. डॉक्टरों के अनुसार, लू और डिहाइड्रेशन के मामले बढ़ रहे हैं.स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें. खूब पानी पिएं और हल्के रंग के ढीले कपड़े पहनें. साथ ही घरों को ठंडा रखने के लिए पर्दे बंद रखें. पुणे नगर निगम (PMC) ने भी नागरिकों से अपील की है कि वे गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं और जरूरत पड़ने पर हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें.
मौसम विभाग की भविष्यवाणी
मौसम विभाग ने फिलहाल गर्मी से राहत नहीं मिलने के संकेत दिए हैं. IMD के नागपुर प्रादेशिक केंद्र की ओर से जारी चेतावनी के अनुसार, 16 मई तक अकोला, अमरावती समेत पूरे विदर्भ क्षेत्र में हीटवेव की स्थिति बनी रहने की संभावना है. विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते शहरीकरण और हरित क्षेत्रों के घटने से शहरी ऊष्मा द्वीप प्रभाव और तेज हो रहे हैं, जिसके समाधान के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाने और हरित इमारत नीतियों को अपनाने की जरूरत है.