राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार द्वारा कृषि कर्जमाफी योजना की पात्रता शर्तों में दी गई ढील का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले से लाखों किसान योजना के लाभ से वंचित होने से बच जाएंगे. शरद पवार ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि राज्य सरकार ने बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उपज की कीमतों में भारी गिरावट को देखते हुए कर्जमाफी योजना की घोषणा की थी. हालांकि योजना में शुरुआत में कुछ ऐसी शर्तें रखी गई थीं, जिनके कारण बड़ी संख्या में किसान इसका लाभ नहीं ले पाते.
उन्होंने बताया कि पहले 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले शेतकरी कर्जमुक्ति योजना का लाभ लेने वाले किसानों के लिए अधिकतम राहत राशि 50 हजार रुपये तक सीमित कर दी गई थी. इसके अलावा नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए यह शर्त रखी गई थी कि उन्हें 2025-26 और 2026-27 के फसल ऋण का भुगतान भी करना होगा, तभी वे प्रोत्साहन राशि के पात्र होंगे. शरद पवार ने कहा कि इन शर्तों के कारण लाखों किसानों को योजना से बाहर होना पड़ता. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली सरकार का इन दोनों शर्तों को वापस लेने के लिए आभार जताया और कहा कि यह फैसला राज्य के किसानों की भावनाओं के अनुरूप है.
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उन्होंने इस बदलाव के लिए किसान संगठनों, विभिन्न राजनीतिक दलों और उनके नेताओं को भी बधाई दी, जिन्होंने इन शर्तों के खिलाफ आवाज उठाई. शरद पवार ने विशेष रूप से अपनी पार्टी के विधायक रोहित पवार और उनके सहयोगियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने नियमों में बदलाव कराने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. इससे पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में विपक्ष के प्रस्ताव पर जवाब देते हुए कर्जमाफी योजना में बड़ी राहत का ऐलान किया था. उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 की महात्मा ज्योतिराव फुले कर्जमाफी योजना के लाभार्थी किसान अब पहले की तरह सिर्फ 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें 2 लाख रुपये तक की कर्जमाफी का लाभ मिल सकेगा.
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने यह भी घोषणा की कि अब किसानों को योजना का लाभ पाने के लिए 2026-27 में फसल ऋण चुकाने की अनिवार्य शर्त पूरी नहीं करनी होगी. इसके बजाय, यदि किसी किसान ने किसी भी पिछले दो वर्षों में नियमित रूप से ऋण का भुगतान किया है, तो वह योजना के लिए पात्र माना जाएगा. उन्होंने बताया कि यह फैसला महायुति गठबंधन के विधायकों की मांग पर लिया गया है.